मप्र में दबंगों ने जनजातीय परिवारों की झोपड़ियां फूंकी
पुलिस के मुताबिक त्योंदा थाना क्षेत्र के सिलारपुर में रहने वाले सहरिया जनजातीय परिवारों के सदस्यों को यहां के प्रभावशाली लोग 20 से 50 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी देते हैं। वहीं उन्हे पड़ोसी गांव पड़रई में 100 रुपये प्रतिदिन मजदूरी मिलती है। सहरियाओं ने जब ज्यादा मजदूरी पाने के लिए पड़रई में मजदूरी की तो सिलारपुर के दबंगों को पसंद नहीं आया।
सहरिया जनजातीय के हल्काई का आरोप है कि सिलारपुर के सुघर सिंह, जीवन सिंह आदि ने उनसे कहा कि रहते तो उनके गांव में हो और मजदूरी दूसरी जगह करते हो यह ठीक नहीं है। मजदूरी दर की बात आने पर उनकी पिटाई की गई और 19 झेापड़ियों में बुधवार को आग लगा दी गई। इस अग्निकांड में जनजातीय परिवारों का सब कुछ जल गया। दूसरी ओर 18 लोगों को चोटें आई है जिनमें से आठ का इलाज जारी है।
गंजबासौदा के अनुविभागीय अधिकारी पुलिस गिरीश बेाहरे ने गुरुवार को आईएएनएस से चर्चा करते हुए बताया कि सिलारपुर गांव के विवाद की वजह मजदूरी है, वर्तमान में उड़द की कटाई चल रही है और मजदूरों की मांग ज्यादा है। सिलारपुर के लोगों का कहना है कि सहरिया परिवार उनके गांव में रहते है लिहाजा कम दर पर उनके खेतों में मजदूरी करें, वहीं उन्हे पडोसी गांव में लगभग दोगुनी मजदूरी मिल रही है। पुलिस ने मारपीट व आगजनी करने के आरोप में 27 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है इनमें से चार हिरासत में है। वहीं प्रशासन ने पीड़ित परिवारों को एक शाला भवन में रहने की व्यवस्था की है, साथ उनके खाने का इंतजाम कर दो-दो हजार की सहायता राशि प्रदान की गई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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