अमरीका में 9/11 की नवीं बरसी

अमरीका में 9/11 की नवीं बरसी

अमरीका में 9/11 हमलों की नौवीं बरसी घटनास्थल पर इस्लामी केंद्र बनाए जाने और कुरान को जलाने की धमकी के विवादों के बीच मनाई जा रही है.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स अमरीकी रक्षा विभाग पेंटागन में एक कार्यक्रम में शामिल होंगे. 11 सितंबर 2001 को पेंटागन पर भी हमला किया गया था.

राष्ट्रपति की पत्नी मिशेल ओबामा और हमलों के समय राष्ट्रपति रहे जॉर्ज डब्ल्यू बुश की पत्नी लॉरा बुश पेन्सिल्वेनिया में रहेंगी जहाँ एक विमान तब गिरा जब यात्रियों और चालक दल के लोगों ने एक अपहर्ताओं से दोबारा विमान का नियंत्रण लेने की कोशिश की.

लेकिन सबसे बड़ा आयोजन न्यूयॉर्क में हो रहा है जहाँ दो विमान वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की दो गगनचुंबी इमारतों से टकराए थे. हमले की बरसी पर हमले में मारे गए लोगों के संबंधी मारे गए लोगों के नाम पढ़ रहे हैं.

वैसे बरसी के दिन कुरान जलाने की धमकी देनेवाले एक पादरी ने दुनिया भर में विरोध के बाद अपनी योजना स्थगित कर दी है.

बीबीसी संवाददाता लॉरा ट्रेवेलियान का कहना है कि इस साल की बरसी शायद अब तक की सबसे अधिक विवादित बरसी है.

आधिकारिक कार्यक्रम खत्म होने के बाद ग्राउंड ज़ीरो के नजदीक इस्लामी कम्युनिटी सेंटर और मस्जिद बनाए जाने के पक्ष में और विरोध में रैलियाँ निकाली जाएँगी.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि दोनों ही पक्ष अपने-अपने हितों के लिए इस अवसर का भावनात्मक इस्तेमाल करना चाहते हैं.

अमरीका में 11 सितंबर 2011 के हमले में मारे गए लोगों के कुछ रिश्तेदार इसे ठीक नहीं मानते हैं जबकि कुछ परिवार इसे इस आधार पर समर्थन दे रहे हैं कि इससे धार्मिक स्वतंत्रता के प्रति अमरीका की प्रतिबद्धता जाहिर होगी.

इस हमले में अपने पिता को खो चुकी स्टीफन पार्कर ने इस्लामिक केंद्र बनाने के समर्थन में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया. उन्होंने कहा, "मुझे यह देखकर दुख होता है कि जब लोग सभी मुसलमानों की तुलना अपहरणकर्ताओं से करते हैं. यह विवाद इतना बड़ा हो गया है कि 9/11 की बरसी पीछे चली गई है."

वहीं इस हमले में अपने पिता को खोने वाली सैली रीगनहॉर्ड का कहना है, "हमारी भावना है कि इस जगह मस्जिद का बनाया जाना 9/11 के हमले में मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति सबसे बड़ा अपराध होगा."

इस्लामी केंद्र और मस्जिद के समर्थन में अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी बयान दिया था कि अमरीकी मुसलमानों को किसी भी निजी संपत्ति पर अपने पूजा स्थलों को बनाने का अधिकार है.

लेकिन अगले ही दिन उन्होंने यह भी कहा कि वह ग्राउंड ज़ीरो के इतने नज़दीक बनने वाले इस केंद्र को बनाने की बुद्धिमत्ता पर कोई राय नहीं दे रहे थे.

इसके अलावा कई रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक नेताओं ने भी इस केंद्र का विरोध किया है.

लेकिन केंद्र के समर्थकों का मानना है कि अमरीकी मुसलमानों को भी हर अमरीकी की ही तरह किसी भी जगह आज़ादी के साथ अपने पूजा स्थल बनाने का संवैधानिक हक़ है और उन्हे यह नहीं कहा जाना चाहिए कि कुछ जगहों पर वह मस्जिद नहीं बना सकते हैं.

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