यमुना में उफान जारी, दिल्ली के निचले इलाके जलमग्न (लीड-2)

हरियाणा की ओर से अधिक से अधिक पानी छोड़े जाने की वजह से नदी उफान पर है। इसके कारण यमुना का पानी आईएसबीटी में घुस गया है।

बाढ़ नियंत्रण विभाग के अनुसार यमुना का जलस्तर 206.6 मीटर तक पुहंच गया है, जो खतरे के निशान से 177 सेंटीमीटर अधिक है।

एक अधिकारी ने चेतावनी दी, "अगर हरियाणा और पानी छोड़ता है तो यह और भी बढ़ेगा।"

बाढ़ से सबसे अधिक नदी के किनारे रहने वाले मध्यवर्गीय और कम आय वाले लोग प्रभावित हुए हैं। अधिकारी ने बताया कि निचले इलाके गढ़ी मांडु, उस्मानपुर पुश्ता, जगतपुर गांव और शास्त्री नगर में पानी घुस गया है।

मध्य जिले मयूर विहार फेस-एक में पानी भर गया है। अधिकारी ने बताया कि मुख्य सड़क किनारे सैकड़ों श्रामिक तम्बू लगाकर रह रहे हैं।

बाढ़ नियंत्रण विभाग के बी. एस. गौतम ने बताया, "आईटीओ पुल के पास रहने वाले करीब 1,5000 लोगों को दिल्ली नगर निगम के शिविरों में पहुंचाया गया है।"

अधिकारियों ने हरियाणा से यमुना में 30,000 क्यूसेक और पानी छोड़े जाने की संभावना जताई है। दिल्ली में बाढ़ की आशंका के बीच मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने लोग से आतंकित न होने को कहा है।

उधर, यमुना नदी में उफान से निचले इलाकों में पानी भर जाने के कारण भारतीय रेलवे ने शनिवार को 53 रेलगाड़ियों को या तो रद्द कर दिया या उनके रास्ते में बदलाव कर दिया। इनमें कई कम दूरी की रेलगाड़ियां भी शामिल हैं।

उत्तर रेलवे के अनुसार कालका मेल, लाल किला एक्सप्रेस, सत्याग्रह एक्सप्रेस, फरक्का एक्सप्रेस, हावड़ा जनता एक्सप्रेस और शहीद एक्सप्रेस सहित लंबी दूरी की कई रेलगाड़ियों के रास्ते में बदलाव किया गया है या फिर उन्हें रद्द कर दिया गया है।

उत्तर रेलवे के एक प्रवक्ता ने बताया, "रेल और सड़क यातायात के लिए पुराने यमुना पुल को बंद कर दिए जाने की वजह से कई रेलगाड़ियों को या तो रद्द कर दिया गया है या उनके रास्ते में बदलाव किया गया है।"

प्रवक्ता ने बताया कई रेलगाड़ियों को दिल्ली से पहले ही रोक दिया गया है।

अधिकारी ने बताया कि उत्तर प्रदेश के खुर्जा में कोलकाता-दिल्ली लाल किला एक्सप्रेस को रोकने का फैसला किया गया है। इसी तरह हावड़ा-दिल्ली जनता एक्सप्रेस को उत्तर प्रदेश के ही हाथरस से लौटा दिया जाएगा। इन दोनों रेलगाड़ियां जहां रुकी हैं, उसी स्टेशन से इनकी सेवा फिर से शुरू की जाएगी।

स्थानीय प्रशासन की मदद के लिए करीब 100 राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया बल (एनडीआरएफ)कर्मी तैनात किए गए हैं।

अधिकारी ने बताया, "नदी के किनारे पर करीब 30 नौकाएं और 100 बूस्टर पंप्स लगाए गए हैं और गढ़ी मांडू, शास्त्री नगर, उस्मानपुर पुश्ता और जगतपुर से पानी निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं।"

वर्ष 1978 में आई बाढ़ के कारण 250,000 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए थे। उस समय नदी का जलस्तर 207.48 मीटर को पार कर गया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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