भगवान बुद्ध ने पावा में किया था अंतिम बार भोजन

कुशीनगर। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर स्थित पडरौना का प्राचीन नाम पावा है। पडरौना वह प्राचीन नगरी है जहां भगवान तथागत बुद्ध काफी दिनों तक रहे और उन्होंने यहां अपने जीवन का अंतिम भोजन किया था। पावा का उल्लेख तमाम बौद्ध ग्रंथों में भी मिलता है।

यह प्राचीन शहर सदियों पहले मल्ल राजाओं का गढ़ हुआ करता था। इसे पावा नगरी के नाम से जाना जाता रहा है। यहां कुंदा नामक एक सैथवार का निवास हुआ करता था। उसने भगवान बुद्ध को भोजन का प्रस्ताव दिया। बुद्ध ने उसका निमंत्रण स्वीकार कर लिया। उनके आने पर कुंदा ने उन्हें दूषित भोजन कराया।

इसके बाद भगवान बुद्ध ने शरीर त्यागने का निर्णय लिया। पावा से करीब 18 किलोमीटर दूर मल्लों की राजधानी कुशीनारा जाकर भगवान ने कुंदा को उपदेश दिया, फिर शरीर त्याग किया। कुछ समय बाद कुंदा की भी मौत हो गई। इस स्थान पर मल्ल राजाओं ने एक स्तूप बनवाया।

बाद में भगवान की अस्थियों के लिए लड़ाई छिड़ गई और द्रोण नामक एक ब्राह्मण ने इसका बंटवारा किया। पावा के निवासियों को पावेयका कहा जाता रहा है। पर्यटन विभाग के अधिकारी पी.के. सिंह का कहना है कि कुशीनगर से पूरब पावा नगर है जहां चुंद नाम के व्यक्ति ने भगवान बुद्ध को भोजन कराया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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