'हर 29 मिनट पर एक महिला के साथ बलात्कार'
राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़े का हवाला देते हुए सिएम ने कहा, "पर्याप्त दहेज न मिलने के कारण प्रत्येक वर्ष 7,600 महिलाएं अपने ससुराल वालों द्वारा मार दी जाती हैं तथा उनके हत्यारों को सजा मिलने का प्रतिशत बहुत कम है।"
उन्होंने 'घर बचाओ, परिवार बचाओ' शीर्षक से घरेलू हिंसा पर आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, "भारत में प्रत्येक दिन दहेज संबंधी हिंसा के कम से कम 50 मामले सामने आते हैं।"
सिएम ने कहा कि कई कानून, संवेदनशील समाज, पूरी तरह सक्रिय पुलिस व्यवस्था तथा संगोष्ठियों एवं जागरूकता कार्यक्रमों के बावजूद जमीनी स्तर पर महिलाओं के खिलाफ अपराध थमता हुआ नहीं लग रहा है।
उन्होंने कहा, "महिलाएं जब किसी हिंसा की रिपोर्ट दर्ज कराती हैं, तब उन्हें परिवार द्वारा विद्रोही के रूप में देखा जाता है।"
एनसीडब्ल्यू की संयुक्त सचिव सुंदरी सुब्रमण्यम पुजारी ने कहा, "महिलाओं के खिलाफ अपराध की रोकथाम के लिए पांच स्तंभों को अधिक सक्रिय होना पड़ेगा। ये हैं बेहतर कानून, कानूनों का उचित कार्यान्वयन, न्यायपालिका, नागरिक समितियां एवं गैर सरकारी संगठन तथा मीडिया।"
उन्होंने सुझाव दिया, "शिक्षा, सशक्तीकरण एवं महिलाओं की कार्यकुशलता का विकास- ये ऐसे बड़े साधन हैं, जिनके माध्यम से महिलाओं के खिलाफ हिंसा रोकी जा सकती है।"
इससे पहले त्रिपुरा की समाज कल्याण मंत्री बिजिता नाथ ने एक दिवसीय इस सम्मेलन का उद्घाटन किया। सम्मेलन में स्थानीय स्वयंसेवी नेताओं का चयन किया गया।
इस अवसर पर पुलिस अधिकारी, गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि, महिला कार्यकर्ता, शिक्षाविद एवं सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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