स्थिति अस्पष्ट, मुख्यमंत्री ने सर्वदलीय बैठक बुलाई

मणिकांत ठाकुर
बीबीसी संवाददाता, पटना
पुलिसकर्मियों को बंधक बनाए जाने पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने शनिवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है.
विश्लेषकों का कहना है कि इस सर्वदलीय बैठक का कोई मतलब नहीं है क्योंकि इस मामले में काफ़ी देर हो चुकी है.
इधर केंद्र सरकार ने माओवादियों की खोज अभियान के लिए राज्य सरकार को दो हेलिकॉप्टर उपलब्ध कराए हैं.
एक और बिहार में पुलिस ने माओवादियों की तलाश में अभियान छेड़ दिया है, तो दूसरी ओर इस मामले में सक्रिय माओवादी नेता अविनाश से संपर्क टूट गया है.
इधर शुक्रवार को बिहार पुलिस ने इस बात की पुष्टि की है कि उसे लखीसराय में जो शव मिला है वह बिहार मिलिटरी पुलिस के हवलदार लुकास टेटे का है. ये उन चार पुलिसकर्मियों में थे जिन्हें माओवादियों ने बंदी बना लिया था.
इसके पहले माओवादियों ने दावा किया था कि उन्होंने सबइंस्पेक्टर अभय यादव को मार दिया था लेकिन उनका शव अभी तक नहीं मिला है इसलिए उनको लेकर आशा बनी हुई है.
माओवादियों ने सरकार को शुक्रवार भारतीय समयानुसार सुबह दस बजे तक का अल्टीमेटम दिया था. ये समय सीमा ख़त्म हो चुकी है.
बिहार की सरकार ने केंद्र सरकार से सुरक्षाबलों की 40 अतिरिक्त कंपनियों की मांग की थी.
लेकिन केंद्रीय गृह सचिव ने कहा है कि उन्हें सुरक्षाबलों की कुछ और कंपनियाँ भेजी जा रही हैं. बिहार को केंद्रीय सुरक्षाबलों की छह कंपनियाँ पहले ही भेजी जा चुकी हैं.
मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने माओवादियों से बातचीत की पेशकश भी की है पर स्पष्ट है कि सरकार ख़ासे दबाव में है.
मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने शुक्रवार सुबह एक मंत्री नरेंद्र सिंह को लखीसराय के घटनास्थल वाले इलाक़े में भेजा था लेकिन अब स्पष्ट नहीं है कि वे माओवादियों के साथ बातचीत की कोशिश करेंगे या उनका प्रयास असफल रहा है.
असंतोष
पर्यवेक्षकों के अनुसार गुरुवार को एक सबइंस्पेक्टर की माओवादियों द्वारा हत्या के दावे से जनता में असंतोष है और पुलिसकर्मियों की रिहाई के प्रयासों में हुई देरी और सरकार की रवैए से लोग संतुष्ट नहीं हैं.
हाल में लखीसराय में पुलिस और माओवादियों की मुठभेड़ के बाद माओवादियों ने चार पुलिसकर्मियों को बंदी बना लिया था और माँग रखी थी कि जेल में क़ैद उनके आठ सहयोगियों को रिहा किया जाए.
सरकार ने जहाँ एक ओर माओवादियों का सामना करने की केंद्र की नीति से असहमति जताई थी वहीं राज्य के पुलिसकर्मियों को रिहा कराने के लिए उसकी ओर से ऐसी पहल नहीं हुई जिसकी उम्मीद की जा सकती थी.
सरकार पर दबाव न केवल जनता की ओर से है बल्कि राज्य में विपक्षी दलों के नेता लालू यादव और रामविलास पासवान की ओर से भी है जिन्होंने इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की माँग की थी.
उधर भाजपा ने कहा है कि समय कार्रवाई करने का है बातचीत करने का नहीं.
'सरकार ने बात नहीं की'
माओवादियों के प्रवक्ता अविनाश ने बीबीसी के पटना दफ़्तर में गुरुवार को फ़ोन कर कहा था, " सरकार ने हमारे साथ बातचीत करने की कोई कोशिश नहीं की और ये माना कि हम केवल धमकी दे रहे हैं. एक जन अदालत में फ़ैसला हुआ और हमने पुलिसकर्मियों में से एक का सफ़ाया कर दिया है. यदि कल सुबह दस बजे तक इस बारे में सरकार बातचीत नहीं करती तो बाक़ी तीन के बारे में फ़ैसला लिया जाएगा."
राज्य के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने कहा है वो नहीं जानते हैं कि दावा सही है या नहीं लेकिन वो चाहेंगे कि ये सही नहीं हो.
उनका कहना था, " इन चार पुलिसवालों का क्या कसूर है? किसी को बंधक बनाकर मोल तोल करना मेरी समझ से उच्च आदर्श का परिचायक नहीं है."
उन्होंने राज्य और देश के बुद्धिजीवियों से अपील की है कि वो इस मामले पर बात करें.
उनका कहना था, " हमारी परिधि लोकतंत्र है और हमने कोशिश की है उसे निभाने की."
परिजन बेहाल
माओवादियों के कब्ज़े में जो पुलिसकर्मी थे, उनके नाम हैं - अभय यादव, रुपेश कुमार, एहसान ख़ान और लुकास टेटे. शुक्रवार को लुकास टेटे का शव बरामद हुआ है.
इन पुलिसकर्मियों के परिजनों की हाल बेहाल है. अभय यादव का परिवार तो मुख्यमंत्री आवास के बाहर धरने पर भी बैठा था.
लखीसराय के पुलिस अधीक्षक और उपाधीक्षक का तबादला किया जा चुका है. इन पर आरोप था कि इन्होंने हालात को देखते हुए समय पर सही रणनीति नहीं अपनाई थी जिसकी वजह से ये स्थिति पैदा हुई.
इधर बिहार पुलिस एसोसिएशन ने चेतावनी दी थी कि अगर बंधक बनाए गए पुलिसकर्मी नहीं छुड़ाए गए तो बिहार के तमाम पुलिस जवान हड़ताल पर चले जाएँगे.
बिहार पुलिस का आरोप है कि केंद्रीय पुलिस रिज़र्व बल (सीआरपीएफ़) के जवान मौक़े पर मौजूद थे लेकिन वो बिहार पुलिस की मदद के लिए आगे नहीं आए.












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