रुचिका छेड़छाड़ मामले में राठौड़ की याचिका खारिज (लीड-1)

न्यायमूर्ति जीतेंद्र चौहान ने अपनी तीखी टिप्पणी में कहा कि राठौड़ का आचरण शर्मनाक था और वह किसी भी राहत के पात्र नहीं हैं।

अदालत ने यह भी कहा कि राठौड़ को एक शिकारी के रूप में नहीं, एक रक्षक के रूप में काम करना चाहिए था।

मजेदार बात यह है कि राठौड़ की याचिका उस दिन खारिज हुई है, जिस दिन उन्होंने चंडीगढ़ के उच्च सुरक्षा वाले बुड़ैल जेल में अपनी सजा के 100 दिन पूरे किए हैं।

उच्च न्यायालय ने राठौड़ की उस याचिका को भी खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने प्रोबेशन पर जेल से रिहाई की मांग की थी।

चंडीगढ़ के जिला एवं सत्र न्यायालय ने 25 मई को राठौड़ के खिलाफ 18 महीने के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी और उन्होंने इस फैसले को चुनौती देते हुए एक पुनरीक्षण याचिका दायर की थी।

रुचिका के वकील पंकज भारद्वाज ने उच्च न्यायालय के बुधवार के आदेश के बाद संवाददाताओं को बताया, "उच्च न्यायालय ने राठौड़ की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी।"

भारद्वाज ने कहा, "प्रोबेशन पर रिहाई की उनकी याचिका भी खारिज हो गई। सत्र अदालत द्वारा सुनाई गई सजा बरकरार रखी गई है। अदालत ने राठौड़ को किसी भी तरह की राहत देने से इंकार कर दिया है।"

रुचिका की सहेली के पिता आनंद प्रकाश और गवाह आराधना ने कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा राठौड़ की याचिका खारिज किए जाने से वे संतुष्ट हैं। ज्ञात हो कि प्रकाश ने ही इस मामले को लड़ कर यहां तक पहुंचाया है।

आनंद प्रकाश ने कहा, "इस निर्णय ने साबित किया है कि कानून सर्वोपरि है। इससे यह साबित हुआ है कि देश में कानून से ऊपर कोई नहीं है। अदालत ने कहा कि आराधना द्वारा दिया गया सबूत खरा है और इसमें कोई खोट नहीं है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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