शिमला में शुरू हो मानसिक स्वास्थ्य में स्नातकोत्तर की पढ़ाई : बिंदल

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की केंद्रीय परिषद के 11वें सम्मेलन को संबोधित करते हुए बिंदल ने कहा कि शिमला का आईजीएमसी इस पाठ्यक्रम को शुरू करने की सभी औपचारिकताएं पूरी करने में सक्षम है तथा मेडिकल काउंसिल को इसके लिए तत्काल अनुमति प्रदान करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रदेश तथा देश में चिकित्सकों की भारी कमी है। चिकित्सा शिक्षा के लिए पहाड़ी राज्यों में भूमि की आवश्यकता को 25 एकड़ से घटाकर 20 एकड़ किया गया है, लेकिन पहाड़ी राज्यों के लिए इसे मेट्रो सिटी के तरह 10 एकड़ किया जाए। चिकित्सालयों एवं महाविद्यालयों की दूरी की सीमा अधिकतम 10 किलोमीटर से बढ़ाकर 15 से 20 किलोमीटर किया जाना चाहिए तथा चिकित्सालयों की संलग्नता की अवधि को 10 वर्ष किया जाए।

बिंदल ने कहा कि विशेषज्ञों की कमी को पूरा करने के लिए प्रदेश में अध्यापक-छात्र अनुपात को 1:1 से बढ़ाकर 1: 2 किया गया है, जबकि इसे बढ़ाकर 1:3 किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 200 बिस्तरों के चिकित्सालयों में 50 एमबीबीएस चिकित्सकों की नियुक्त की स्वीकृति दी जानी चाहिए।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में बीएससी नर्सिग में 370 और जीएनएम नर्सिग में 880 छात्राएं प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं और वर्ष 2012 तक ये सीटें बढ़ाकर 2000 कर दी जाएंगी।

बिंदल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में तंबाकू मुक्ति अभियान को तेजी से लागू किया है। कानून के तहत प्रदेश के अधिकारियों को जुर्माना करने का अधिकार दिया गया है। इससे सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान में भारी कमी आई है तथा शिमला को सामाजिक संस्थानों द्वारा तंबाकू मुक्त घोषित किया गया है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य के मामले में अन्य कई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू की हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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