शत्रु संपत्ति विधेयक वापस लिया गया
नई दिल्ली, 30 अगस्त (आईएएनएस)। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और समाजवादी पार्टी (सपा) के तीव्र विरोध के कारण सरकार ने उस कानून को संशोधित करने वाले एक विधेयक को सोमवार को वापस ले लिया, जो उन संपत्तियों से निपटता है, जिन्हें 1947 में पाकिस्तान जाने वाले छोड़ कर चले गए थे।
शत्रु संपत्ति अधिनियम-1968 के प्रस्तावित संशोधन पर मचे हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। शत्रु संपत्ति अधिनियम पाकिस्तान गए लोगों की संपत्तियों की देखरेख के लिए सरकार को अधिकृत करता है।
केंद्रीय गृह मंत्री पी.चिदंबरम ने कहा कि दिन की कार्यसूची में दर्ज किया गया यह विधेयक अब अगले सत्र में पेश किया जाएगा, क्योंकि कुछ सदस्यों ने अध्यादेश और संशोधनों के अध्ययन के लिए समय मांगा है।
विधेयक सबसे पहले शून्यकाल में लोकसभा में लाया गया। उसके बाद सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह ने सरकार की यह कहते हुए आलोचना की कि वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ मिल कर मुसलमानों के खिलाफ साजिश रच रही है। राजद ने सपा का समर्थन किया।
मुलायम सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी विधेयक का विरोध करेगी, क्योंकि यह कांग्रेस की मुस्लिम विरोधी नीति का हिस्सा है।
मुलायम सिंह ने कहा, "यह एक ऐसा विधेयक है जो मुसलमानों को दूसरे दर्जे का नागरिक बना देगा और उनके भीतर हीन भावना पैदा कर देगा।"
सिंह ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि इस तरह की संपत्तियों के संरक्षक (सरकार) को चाहिए कि वह उत्तराधिकारियों को उन संपत्तियों को वापस कर दे।
संसदीय मामलों के मंत्री पवन कुमार बंसल ने विश्वास दिलाने की कोशिश की कि सरकार इन चिंताओं को दूर करने के लिए संशोधन कर रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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