आगरा में यमुना उफान पर

आगरा में शनिवार को यमुना का जलस्तर 494.5 फुट तक पहुंच गया जो खतरे के निशान 495 फुट के करीब है। शुक्रवार को नदी का जलस्तर 494 फुट था।

ताजेवाला, ओखला और गोकुल बांधों से पानी छोड़े जाने के कारण शहर पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। आगरा में इससे पहले वर्ष 1978 में बाढ़ आई थी। वर्ष 1995 में भी यमुना नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया था।

ब्रज मंडल हेरिटेज कंजर्वेशन सोसायटी के अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा ने आईएएनएस को बताया,"त्रासदी के अलावा इस बाढ़ के पानी से नदी में मौजूद गाद की सफाई करने में मदद ही मिलेगी।"

बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रांतीय सशस्त्र पुलिस (पीएसी)के जवानों को सतर्क कर दिया गया है और बाढ़ प्रभावित गांवों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पुहंचाने के लिए विशेष टीमें भेजी गई हैं।

इधर, मथुरा में यमुना नदी का जलस्तर पहले ही खतरे के निशान 46 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है जिससे निचले इलाके जलमग्न हो गए हैं। वृंदावन में नदी के निकट रिहायशी इलाकों में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है।

अधिकारियों के मुताबिक बाढ़ की वजह से फतेहाबाद, एतमादपुर और आगरा की किरोली तहसील में बाजरे की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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