धार्मिक पहनावा बाध्यकारी नहीं: बांग्लादेश हाईकोर्ट

धार्मिक पहनावा बाध्यकारी नहीं: बांग्लादेश हाईकोर्ट
बांग्लादेश हाईकोर्ट ने फ़ैसला सुनाया है कि किसी भी पुरुष या महिला को काम करने के स्थान अथवा शिक्षा संस्थान में धार्मिक पोशाक पहनने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है.अदालत के सामने ये मामला उन ख़बरों के बाद आया था जिनके अनुसार बांग्लादेश के एक सरकारी कॉलेजों में बुर्क़ा पहन कर न आने वाली लड़कियों को परिसर में घुसने की अनुमति नहीं दी जा रही थी.

इस मामले को सामने लाने वाले एक वकील का कहना था कि ये फ़ैसला महत्वपूर्ण है.लेकिन ढाका स्थिति बीबीसी संवाददाता का कहना है कि राजधानी ढाका के बाहर इस फ़ैसले को लोग ज्यादा अहमियत देते नज़र नहीं आ रहे हैं.संवाददाता का कहना है कि ऐसे ही एक अन्य मामले में अदालत ने बांग्लादेश के अधिकारियों से पूछा है कि क्यों न महिलाओं के खेलों और सांस्कृतिक गतिविधियों में हिस्सा लेने को ग़ैरक़ानूनी क़रार दे दिया जाए.

बुर्क़े पर बहस

ग़ौरतलब है कि इस समय दुनियाभर में बुर्क़े को लेकर बहस चल रही है.फ़्रांस ने तो सार्वजनिक स्थानों पर बुर्क़ा पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया है.फ्रांसीसी सरकार का कहना है कि पूरे चेहरे तथा शरीर को ढँकने वाले बुर्के़ महिलाओं के अधिकारों का हनन करते हैं और वे फ्रांस के धर्मनिरपेक्ष चरित्र के प्रतिकूल हैं.फ्रांस के नए क़ानून के तहत सार्वजनिक स्थान पर बुर्क़ा पहनने वाली महिलाओं पर 150 यूरो का जुर्माना लगाया जाएगा.

साथ ही उन पुरुषों को 30 हज़ार यूरो तक जुर्माना भरना पड़ सकता है, जो महिलाओं को बुर्का़ पहनने के लिए बाध्य करेंगे.स्पेन और बेल्जियम में भी बुर्क़े को लेकर बहस चल रही है.हाल में ऑस्ट्रेलिया के एक जज ने भी धोखाधड़ी के एक मामले में मुस्लिम महिला से गवाही देने के लिए अपने चेहरे से नक़ाब हटाने को कहा था.

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