केरल में ओणम की धूम

ओणम का पर्व एक सप्ताह तक चलता है। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों को दौर जारी रहता है। त्योहार के मुख्य दिन थिरुओणम के दिन लोग मिलकर खरीदारी करते हैं।

उल्लेखनीय है कि महिलाएं ओणम के दिन सुबह जल्दी जगती हैं और अपने घरों के बाहर फूलों से खुबसूरत 'पूकलम' यानी फूलों से रंगोली बनाती हैं और पूजा घर में दीपक जलाती हैं। जबकि घर की कुछ महिलाएं पकवान बनाने में व्यस्त रहती हैं।

ओणम के दिन नए पोशाक या 'अनापाड़ा' मिलने की वजह से बच्चे बेहद खुश होते हैं।

पतनामथित्ता जिले में स्थित प्रतिद्ध सबरीमाला मंदिर और त्रिसूर के समीप गुरुवैयूर मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना के लिए अन्य मंदिरों की तुलना में ज्यादा भीड़ रही।

इस अवसर पर केले के पत्ते पर सामूहिक रूप से किया जाने वाला भोज दोपहर बाद किया गया।

ओणम के अवसर पर पारीप्पू, सांभर, मिक्स सब्जी, कालन, आम के अचार, खिचड़ी, काली सेम और नारियल से बना ओलन, केले के चिप्स जैसे पकवान साध्य भोज के समय लोगों को परोसे जाते हैं।

कई महिलाओं ने सीमित पकवान ही बनाए। सेवानिवृत्त प्रोफेसर रीमा देवी ने बताया कि वह सभी 24 व्यंजन नहीं बनाती हैं। हालांकि कुछ साल पहले वह अभी पकवान बनाया करती थीं।

उन्होंने कहा, "ईमानदारी से बताती हूं कि जितना मैं कर सकती हूं उतने ही पकवान बनाती हूं। मेरा शरीर 24 व्यंजन बनाने की अनुमति नहीं देता है। मेरी नौकरानी ने आज छुट्टी ले रखी है, इसलिए मैंने कुछ पकवान कल ही बना लिए थे।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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