कश्मीरी सिखों को धमकी की हर तरफ निंदा

Omar Abdullah
श्रीनगर/चण्डीगढ़/नई दिल्ली। कश्‍मीर घाटी में कुछ सिख परिवारों को आतंकी संगठनों द्वारा भेजे गए धमकी भरे पत्र मिलने की घटना की चारों तरफ निंदा हो रही है। एक तरफ सिखों ने राज्‍य के मुख्‍यमंत्री उमर अब्‍दुल्‍ला से बात की, वहीं दूसरी ओर गृहमंत्री पी चिदंबरम ने आश्‍वासन दिया है कि घाटी के सिखों की रक्षा के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।

भारतीय जनता पार्टी ने केंद्र सरकार से घाटी में सिखों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जम्मू एवं कश्मीर सरकार को तुरंत निर्देश जारी करने की मांग की। साथ ही विश्व हिंदू परिषद और सिख संगठनों ने भी इस मसले पर आक्रोश जताया है। उमर अब्दुल्ला ने सिखों के एक प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि सरकार उनके जान-माल की हिफाजत के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगी। घाटी के कुछ सिख परिवारों को चरमवादियों की ओर से अज्ञात पत्र प्राप्त हुआ, जिसमें सिखों से इस्लाम धर्म अपनाने या फिर इलाके को छोड़ देने की धमकी दी गई थी। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की।

अलगाववादी संगठनों ने भी निंदा की

उदारपंथी अलगाववादी नेता और हुर्रियत के एक धड़े के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक ने भी सिखों को मिली धमकी की निंदा की है। उन्होंने कहा कि सिख कश्मीरी समाज के हिस्सा हैं और यह हर मुसलमान का कर्तव्य है कि यहां सिख समुदाय के सम्मान और जीवन की हिफाजत करे।

घाटी में 1990 के दशक के प्रारंभ में शुरू हुए सशस्त्र अलगाववादी अभियान के बाद कश्मीरी पंडित भले ही घाटी से पलायन कर गए, लेकिन सिख घाटी में अपनी जगह बने हुए हैं। कश्मीर घाटी में लगभग 60,000 सिख विभिन्न शहरों व गांवों में निवास करते हैं।

उधर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने केंद्र सरकार से कहा कि वह घाटी में सिखों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जम्मू एवं कश्मीर सरकार को तुरंत निर्देश जारी करे। पार्टी ने कहा है कि वहां सिखों को इस्लाम धर्म अंगीकार करने या खतरनाक परिणाम भुगतने की गुमनाम धमकियां मिल रही हैं।

बर्दाश्‍त करने लायक घटना नहीं

पार्टी महासचिव जगत प्रकाश नाड्डा ने चंडीगढ़ में संवाददाताओं से कहा, "ऐसी घटनाएं हमारे देश में बर्दाश्त के लायक नहीं हैं। सभी अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों को यहां सुरक्षा का अहसास होना चाहिए तथा देश के प्रत्येक राज्य में उन्हें सुरक्षा मिलनी चाहिए। हम यह बात जम्मू एवं कश्मीर में रह रहे सिखों के अलावा सभी अल्पसंख्यक समुदायों के बारे में कह रहे हैं। किसी को उनके अधिकारों का हनन करने और समानता पर आघात करने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए।"

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और सिख संगठनों ने कहा कि यदि अल्पसंख्यक सिखों को घाटी छोड़ने के लिए मजबूर किया गया तो देश के दूसरे इलाकों में इसकी विपरीत प्रतिक्रिया हो सकती है। विहिप के साथ संयुक्त बयान जारी करते हुए शिरोमणि अकाली दल और राष्ट्रीय सिख संगठन ने कहा कि घाटी में सिखों की रक्षा करने में केंद्र और जम्मू एवं कश्मीर की सरकारें असफल हुई हैं।

संवाददाता सम्मेलन में विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष यू. नायक, शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सरदार बख्शी परमजीत सिंह और राष्ट्रीय सिख संगठन के प्रवक्ता अवतार सिंह शास्त्री ने कहा कि सिख हमेशा बुराई का विरोध करते हैं। घाटी में सिख अल्पसंख्यक हैं लेकिन यह भी सच है कि देश के अन्य इलाकों में मुस्लिम अल्पसंख्यक हैं।

उन्होंने कहा कि 1947 में विभाजन धार्मिक आधार पर हुआ था जिसमें मुस्लिमों को पाकिस्तान और हिंदू और सिखों को भारत दिया गया था। बयान में कहा गया कि कश्मीर में हो रही हिंसा पाकिस्तान प्रायोजित है। कश्मीर में प्रदर्शन कर रहे लोगों को पाकिस्तान से आर्थिक मदद मिल रही है। प्रदेश के कमजोर मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक सिखों की सुरक्षा करने में असफल हुए हैं। बयान में कहा गया कि सरकार प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति सुधारे और विस्थापित हुए कश्मीरी पंडितों की वापसी करे।

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