संशोधित परमाणु दायित्व विधेयक पर भी आपत्तियां

नई दिल्ली, 22 अगस्त (आईएएनएस)। संशोधित परमाणु दायित्व विधेयक पर भी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) और वामपंथी पार्टियों ने आपत्ति खड़ी की है। संशोधित विधेयक पर बुधवार को संसद में चर्चा होनी है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने कहा कि लगता है कि जिस मसौदा विधेयक पर सहमति बनी थी, उसमें और भी गड़बड़ियां हुई हैं। जबकि वाम दलों ने आरोप लगाया है कि विधेयक में किया गया नया संशोधन भी विदेशी परमाणु आपूर्तिकर्ताओं के पक्ष में है।

असैन्य परमाणु क्षतिपूर्ति दायित्व विधेयक-2010 के अंतिम मसौदा अभी तक आधिकारिक रूप से प्रकाशित नहीं किया गया है।

कैबिनेट ने शुक्रवार को विपक्षी पार्टियों द्वारा खड़ी की गई आपत्तियों को दूर करने के लिए विधेयक में संशोधन किया था। सरकार विधेयक पर चर्चा के लिए उसे बुधवार को संसद में पेश करना चाहती है।

ताजा आपत्तियां उपबंध 17(बी) में किए गए संशोधन पर उठाई गई हैं। यह उपबंध भारतीय रिएक्टर संचालक को इस बात का अधिकार देता है कि खराब उपकरण की आपूर्ति के कारण हुई दुर्घटना की स्थिति में आपूर्तिकर्ता पर वह तभी मुकदमा कर सकता है, जब आपूर्ति परमाणु क्षति पहुंचाने के इरादे से की गई हो।

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता अरूण जेटली ने कहा कि संशोधन की भाषा बुनियादी तौर पर आपूर्तिकर्ताओं को दायित्व से मुक्त करती है।

जेटली ने आईएएनएस से कहा, "अब ऐसा लगता है कि भाजपा और सरकार के बीच जिस मूल मसौदे पर सहमति बनी थी, उसमें एक और गड़बड़ी की गई है।"

भाजपा प्रवक्ता निर्मला सीतारमन ने आईएएनएस से कहा कि भाजपा उस हर बदलावों का विरोध करेगी, जिसे आपूर्तिकर्ताओं के दायित्व को हल्का करने के लिए किया गया होगा। उन्होंने कहा, "हम सदन में अवांछित बदलावों का विरोध करेंगे।"

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के सचिव डी.राजा ने कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार बहुराष्ट्रीय कंपनियों के दबाव में काम कर रही है।

राजा ने कहा, "सरकार को भोपाल गैस त्रासदी से कुछ सीख लेनी चाहिए।" उन्होंने कहा कि यदि आपूर्तिकर्ताओं की मदद करने के लिए जानबूझकर संशोधन किए गए हैं तो उनकी पार्टी विधेयक का विरोध करेगी।

मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के पोलित ब्यूरो सदस्य एस.रामचंद्रन पिल्लै ने आईएएनएस से कहा कि सरकार एक गड़बड़ी के बाद दूसरी गड़बड़ी कर रही है।

रामचंद्रन ने आरोप लगाया, "सरकार विधेयक को गुपचुप और भ्रामक तरीके से विधेयक को आगे बढ़ाना चाहती है। उसने विपक्ष को बांटने की भी कोशिश की है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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