टीकाकरण मामला : केंद्रीय दल ने कहा, वैक्सीन नकली नहीं (लीड-1)
इस बीच राज्य सरकार ने प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर मोहनलाल गंज सामुदायिक केंद्र के चिकित्सा अधीक्षक के.एस. त्रिवेदी सहित छह स्वास्थ्यकर्मियों को निलंबित कर दिया और जांच रिपोर्ट आने तक टीकाकरण रोकने के निर्देश दिए गए हैं। उधर इस मामले में मोहनलाल गंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के उपायुक्त स्तर के एक अधिकारी की अध्यक्षता में चार सदस्यीय दल रविवार शाम मोहनलालगंज पहुंचा। दल के सदस्यों ने प्रभावित गांवों का दौरा करने के साथ मोहनलाल गंज सामुदायिक केंद्र जाकर कोल्ड चेन का मुआयना किया। साथ ही वैक्सीन की पड़ताल की, जिसका टीकाकरण में इस्तेमाल किया गया था।
दल के अध्यक्ष एवं स्वास्थ्य मंत्रालय के उपायुक्त अजय खेरा ने संवाददाताओं से कहा कि वैक्सीन नकली होने की संभावना नहीं है, क्योंकि अगर वैक्सीन नकली होती है तो उसका गलत असर केवल दो-चार बच्चों पर नहीं होता, बल्कि बड़ी संख्या में मामले सामने आते।
उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सही कारण स्पष्ट हो पाएंगे। वैक्सीन को सील करके रासायनिक विश्लेषण के लिए भेज दिया गया है। जांच दल ने देर शाम राज्य के स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों से लखनऊ में मुलाकात की।
उल्लेखनीय है कि शनिवार को समयबद्ध टीकाकरण के बाद मोहनलाल गंज क्षेत्र के बिंदौना, पदमनखेड़ा और रामपुर गढ़ी गांव के छह से नौ वर्ष उम्र के चार बच्चों की मौत हो गई थी। मौत के शिकार दो बच्चे बिंदौना तथा एक पदमनखेड़ा और दूसरा रामपुर गढ़ी गांव के रहने वाले थे।
राज्य सरकार ने छत्रपति साहू जी महाराज चिकित्सा विश्वविद्यालय (सीएसएमएमयू) के बाल रोग विभाग को इस मामले को सौंपने के साथ ही इसकी जांच के आदेश शनिवार को ही दे दिए गए थे।
राज्य के परिवार-कल्याण विभाग के महानिदेशक एस.पी. राम ने कहा कि जांच रिपोर्ट आने तक टीकाकरण रोकने के निर्देश दिए गए हैं।
इससे पहले, शासन ने शनिवार देर रात प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर मोहनलाल गंज सामुदायिक केंद्र के चिकित्सा अधीक्षक के.एस. त्रिवेदी सहित छह स्वास्थ्यकर्मियों को निलंबित कर दिया।
राम ने कहा कि हमने (स्वास्थ्य विभाग) इस मामले में मोहनलाल गंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।
लखनऊ के पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) अशोक प्रसाद ने आईएएनएस को बताया कि पूरी मेडिकल टीम के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है। किसी के खिलाफ नामजद मामला दर्ज नहीं हुआ है। टीम में कौन-कौन था और घटना के लिए कौन जिम्मेदार है, इसकी जांच की जा रही है।
ज्ञात हो कि शनिवार को खसरा, क्षयरोग और विटामिन-ए के टीके लगाए जाने के कुछ ही देर बाद बच्चे बीमार होने लगे। मौत के शिकार हुए बच्चों (दो लड़कियां और दो लड़के) की पहचान रेखा, तान्या, सत्यम और साहिल के रूप में की गई है। ये बच्चे अत्यंत गरीब परिवार के थे। लखनऊ के जिलाधिकारी अनिल कुमार सागर ने कहा कि टीकाकरण अभियान में इस्तेमाल की गई दवाओं की शीशी जब्त करके रसायनिक विश्लेषण के लिए भेज दी गई है।
टीकाकरण से हुई चार बच्चों की मौत के बाद ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ग्रामीण घटना से इतने भयभीत हो गए हैं कि वे भविष्य में अपने बच्चों को किसी भी तरह का टीका न लगवाने की बात कह रहे हैं।
ग्रामीणों को संदेह है कि बच्चों को पिलाई गई विटामिन-ए की बूंदें मौतों का कारण बनीं। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा कि किन वजहों से मौतें हुईं।
गौरतलब है कि लखनऊ में चार वर्ष पहले चलाए गए राष्ट्रीय अंधता निवारण अभियान के दौरान भी विटामिन-ए की बूंदें पीने से दो बच्चों की मौत हो गई थी और कई बीमार हो गए थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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