प्राचीन प्रवासियों की स्मृति में कोलकाता में बनेगा स्मारक
अनिंद्य राय वर्मन
नई दिल्ली, 22 अगस्त (आईएएनएस)। अगले वर्ष के प्रारंभ में कोलकाता में एक प्रवासी स्मारक का उद्घाटन किया जाएगा। यह भारत के प्राचीन प्रवासियों के प्रति एक श्रद्धांजलि के रूप में होगी।
ज्ञात हो कि हजारों की संख्या में दिहाड़ी मजदूरों ने दूरवर्ती ब्रिटिश उपनिवेशों में काम करने के लिए 1834-1920 के दौरान भारत छोड़ दिया था और अब उनके वंशज पूरे कैरिबियाई और अफ्रीकी क्षेत्रों में फैले हुए हैं।
किडरपोर (दमरारा) डिपो क्लाक टॉवर में निर्मित होने वाले स्मारक का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाएगी। बाद में यहां एक प्रवासी संग्रहालय की इमारत तैयार की जाएगी।
प्रवासी मामलों के मंत्रालय में संयुक्त सचिव जी.गुरुचरण ने आईएएनएस को बताया, "प्रवासी मामलों के मंत्री व्यालार रवि इस परियोजना का संचालन कर रहे हैं। वह महसूस करते हैं कि अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और आस्ट्रेलिया जैसे नए प्रवासी देशों के प्रति 1950-60 के दशक से ही बहुत ज्यादा ध्यान दिया गया है। जबकि दक्षिण अफ्रीका, मॉरीशस, सूरीनाम और त्रिनिदाद एवं टोबैगो जैसे प्राचीन प्रवासी देशों के प्रति ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया।"
गुरुचरण ने कहा, "यह स्मारक और संग्रहालय अपने तरीके का भारत में और शायद एशिया में पहला स्थल होगा।"
इस स्मारक के साथ ही भारतीय मूल के गुयाना निवासी अशोक रामसरन का सपना साकार हो जाएगा। रामसरन भारतीय मूल के लोगों के वैश्विक संगठन (गोपियो) के कार्यकारी उपाध्यक्ष हैं। वह इस परियोजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
रामसरन ने भावुक अंदाज में न्यूयार्क से फोन पर बताया, "मेरे दादा ने 1853 में कोलकाता बंदरगाह पर भारत को अलविदा कहा था। वहां से जहाज के जरिए गुयाना पहुंचने में उन्हें 100 दिन लगे थे। जबकि मुझे विमान के जरिए कोलकाता पहुंचने में 24 घंटे से भी कम समय लगते हैं।"
गुयाना के लेटर केन्नी विलेज में पैदा हुए रामसरन आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका चले गए और परिवार के साथ वहीं बस गए। स्मारक और संग्रहालय स्थल का मुआयना करने के लिए वह पिछले सप्ताह कोलकाता आए थे। प्रवासी भारतीय मामलों के मंत्रालय के सचिव ए.दिदार सिंह और गुरुचरण उनके साथ थे।
रामसरन ने कहा कि कार्य के प्रथम चरण के हिस्से रूप में 11 जनवरी, 2011 को स्मारक की पट्टिका के उद्घाटन की योजना है। इस अवसर पर शीर्ष सरकारी अधिकारियों के अलावा गुयाना, त्रिनिदाद एवं टोबैगो और मॉरीशस के प्रधानमंत्री उपस्थित रहेंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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