ब्लैकबेरी गतिरोध: कुछ सवाल और जवाब
नई दिल्ली, 22 अगस्त। देश के आठ लाख ब्लैकबेरी उपभोक्ता अभी भी यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि सरकार क्या चाहती है और ब्लैकबेरी निर्माता रिसर्च इन मोशन (आरआईएम) ने इस फोन में ऐसे क्या फीचर्स डाले हैं, जिसको लेकर विवाद पैदा हुआ है। यहां हम कुछ सवाल और जवाब पेश कर रहे हैं:
प्रश्न: ब्लैकबेरी सेवाएं क्या हैं? और क्या नहीं हैं?
उत्तर: यह सेवा मोबाइल के जरिए पुश ई-मेल और मेसैंजर की सेवा उपलब्ध कराती है। आरआईएम इन दोनों सेवाओं को एयरटेल, रिलायंस कम्युनिकेशन जैसे मोबाइल सेवा प्रदाताओं के नेटवर्क के जरिए संचालित करती है। इसके अलावा ब्लैकबेरी हैंडसेड की बाकी सभी सेवाएं जैसे एसएमएस, फोन कॉल और इंटरनेट एक्सेस इन्हीं मोबाइल सेवा प्रदाताओं द्वारा दी जा रही सेवाएं हैं ब्लैकबेरी की नहीं। पुश ई-मेल सेवा को यह नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि इस सेवा में ई-मेल को सीधे हैंडसेट के जरिए भेजा जाता है और प्राप्तकर्ता को इसे डाउनलोड करने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
प्रश्न: भारत सरकार क्या चाहती है?
उत्तर: सरकार ब्लैकबेरी के पुश ई-मेल और तीव्र संदेशों को फोन कॉल की तरह टैप करना चाहती है। सरकार चाहती है कि यदि किसी व्यक्ति के किसी अपराध में लिप्त होने का संदेह हो तो उसके खिलाफ लिखित आदेश जारी करके वह उसके फोन से प्रसारित संदेशों को पढ़ सके। सरकार सांकेतिक भाषा के संदेशों को पढ़ने का आदेश भारतीय टेलीग्राफ एक्ट 1885 की धार पांच के अंतर्गत जारी कर सकती है। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़े खतरे या आतंकवाद के मामलों में सरकार यह आदेश जारी कर सकती है। वर्ष 1999 में सर्वोच्च न्यायालय ने इस दायरे को आर्थिक अपराधों के मामले में भी बढ़ा दिया था।
प्रश्न: ब्लैकबेरी के सांकेतिक ई-मेल क्या हैं?
उत्तर: जी-मेल सहित ज्यादार ई-मेल सेवाओं में सांकेतिक भाषा का उपयोग किया जाता है। बड़ी कंपनियां व्यावसायिक उपयोग के लिए सार्वजनिक ई-मेल सेवाओं पर भरोसा नहीं करतीं। इसलिए यह कंपनियां ब्लैकबेरी की पुश ई-मेल सेवाओं का उपयोग कर रही हैं। कंपनियां नहीं चाहतीं कि कोई तीसरा व्यक्ति उनके ई-मेल को पढ़े यहां तक कि ई-मेल सेवा संचालित करने वाली कंपनी। यही ब्लैकबेरी की खासियत है, इसका ई-मेल संदेश पूरी तरह सुरक्षित है इसे आरआईएम भी नहीं पढ़ सकती।
प्रश्न: ब्लैकबेरी की इंटरनेट सेवा (बीआईएस) क्या है और क्या सरकार इसे प्राप्त कर सकती है?
उत्तर: बीआईएस व्यक्तिगत उपयोग कर्ताओं दो तरह के ई-मेल संदेश प्रसारित करने की सेवा है। इसमें आसान संदेश प्रसारित करने के दौरान आसान संकेतों का उपयोग किया जाता है। इस सेवा के उपयोगकर्ता सुरक्षा के लिए नहीं बल्कि ब्लैकबेरी की अन्य गुणवत्ताओं के कारण इसका उपयोग करते हैं। एयरटेल और वोडाफोन के नेटवर्क से इन संकेतबद्ध संदेशों को आरआईएम तक पहुंचाया जाता है आरआईएम इसे सामान्य भाषा में परिवर्तित करके प्राप्तकर्ता को भेज देती है। अब आरआईएम ने सरकार से समझौता किया है कि वह बीआईएस के संदेशों को खूफिया एजेंसियों को उपलब्ध कराएगी।
प्रश्न: ब्लैकबेरी की कंपनी सेवाएं (बीईएस) क्या हैं?
ए- क्या आरआईएम इस सेवा के संदेशों को नहीं पढ़ सकती?
उत्तर- बीईएस सेवा आरआईएम का प्रमुख उत्पाद है। यह इतना सुरक्षित है कि आरआईएम भी इसे नहीं पढ़ सकती। इसके लिए सेवा प्रदाता कंपनी को बीईएस सर्वस सॉफ्टवेयर की आवश्यकता पड़ती है। इस सेवा में हैंडसेट से प्रसारित संदेश कठिन संकेतों में परिवर्तित होकर सर्वर के जरिए संचालित होता है। यह ई-मेल एयरटेल के नेटवर्क से कनाडा में रिम के बीईएस सर्वर तक जाते हैं और वहां से प्राप्तकर्ता तक पहुंचते हैं, पूरे रास्ते में यह संकेतबद्ध ही रहते हैं। इन्हें सामान्य भाषा में परिवर्तित करने का पासवर्ड सिर्फ सेवा उपयोगकर्ता के पास होता है। यदि कंपनी से बाहर के किसी व्यक्ति को यह ई-मेल भेजा जाता है तो कंपनी के मलसर्वर से इसे सामान्य भाषा में परिवर्तित कर दिया जाता है। रिम के पास भी इसे परिवर्तित करने का पासवर्ड नहीं होता। हालांकि क्या रिम के पास इसे डिकोड करने का कोई गुप्त तरीका है या नहीं यह कोई नहीं जानता?
प्रश्न: तब सरकारी एजेंसियां आतंकवादी खतरा होने पर इन मेल सेवाओं को कैसे पढ़ पाती हैं?
उत्तर: जिस कंपनी में आतंकवादी कार्यरत होता है सरकारी अधिकारी उस कंपनी से संपर्क करते हैं और संबंधित व्यक्ति के ई-मेल प्राप्त करते हैं। ऐसे में कंपनी को सभी ई-मेल्स का खुलासा करने की जरूरत नहीं पड़ती।
प्रश्न: क्या बीईएस आतंकवादियों की पसंद बन सकता है?
उत्तर: बीईएस उपयोगकर्ता एक कंपनी में काम करते हैं। कंपनी इन सभी इमेल को न सिर्फ पढ़ सकती है बल्कि इन्हें संग्रहित भी करती है। बीआईएस आरआईएम के नियंत्रण में होता है इसलिए सरकारी अधिकारियों के लिए इसे प्राप्त करना आसान है। आतंकवादी अपने काम के लिए साइबर कैफे में जीमेल या याहू मेल का इस्तेमाल करते हैं। वह मेल लिखकर अपने ही ड्राफ्ट बाक्स में सेव कर लेते हैं और दूसरी जगह पर बैठा उनका साथी उसी मेल आई डी को खोलकर उसे पढ़ सकता है ऐसे में मेल भेजने की जरूरत ही नहीं पड़ती। जब मेल भेजा ही नहीं गया तो उसके ट्रेस होने की संभावना भी कम होती है। इसके अलावा वे यू सेंड इड जैसी सांकेतिक भाषा में संदेश प्रसारित करने वाली वेबसाइटों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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