गिलानी का सिखों को भरोसा

अल्ताफ़ हुसैन
बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर
भारत प्रशासित कश्मीर में वरिष्ठ पृथकतावादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने अल्पसंख्यक सिख समुदाय को भरोसा दिलाया है कि उन्हें बहुसंख्यक मुस्लिम समुदाय का पूरा भरोसा, सहयोग और समर्थन मिलता रहेगा.
सैयद अली शाह गिलानी ने बीबीसी से बातचीत में कहा है, "सिख समुदाय को अपने बारे में मुसलमानों की सदइच्छा के बारे में अपने दिलो-दिमाग़ में क़तई कोई शक नहीं रखना चाहिए, उन्हें अपने दिल में कोई डर भी नहीं रखना चाहिए."
ऐसी ख़बरें आई थीं कि सिख समुदाय के कुछ लोगों को हाल के दिनों में कुछ अज्ञात लोगों की तरफ़ से धमकियाँ मिल रही थीं और सैयद अली शाह गिलानी ने सिख समुदाय के लोगों को ये आश्वासन उन्हीं ख़बरों के संदर्भ में दिया है.
सिख समुदाय के एक नेता जगमोहन रैना ने बीबीसी से कहा, "अंग्रेज़ी में लिखे कुछ पत्र मिले हैं जिनमें कहा गया है कि सिखों को या तो इस्लाम क़बूल कर लेना चाहिए या फिर कश्मीर घाटी छोड़ देनी चाहिए."
जगमोहन रैना ने कहा कि उन पत्रों पर भेजने वाले के बारे में कोई जानकारी नहीं लिखी है.
उन्होंने कहा कि इस तरह के पत्र मिलने के बाद सिखों में कुछ चिंताएँ फैलने लगी हैं हालाँकि उन्होंने कहा कि सिखों का घाटी छोड़कर कहीं और जाने का कोई इरादा या योजना नहीं है.
क़रीब दो दशक पहले जब कश्मीर घाटी में भारतीय शासन के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह शुरू हुआ था तो लगभग एक लाख कश्मीरी पंडित घाटी छोड़कर जम्मू और दिल्ली चले गए थे लेकिन सिख घाटी में रहे हैं.
सैयद अली शाह गिलानी ने कहा है कि ये पत्र दरअसल भारतीय गुप्तचर एजेंसियों का काम है. उन्होंने कहा कि भारतीय गुप्तचर एजेंसियाँ भारतीय शासन के ख़िलाफ़ चल रहे "कश्मीर छोड़ो आंदोलन" को सांप्रदायिक रंग देना चाहती हैं.
इस बीच पुलिस ने कहा है कि इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया गया है और जाँच की जा रही है.












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