चिंता दूर करना है तो योग करें

'बोस्टन युनीवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडीसिन' के शोधकर्ताओं ने योग और चिंता के कम होने व जीएबीए (ब्रेन गामा-एमीनोबुटायरिक) स्तर के बढ़ने के बीच संबंध स्थापित किया है।

'जर्नल ऑफ एल्टरनेटिव एंड काम्प्लीमेंटरी मेडीसिन' के मुताबिक जीएबीए का कम स्तर अवसाद और चिंता संबंधी अन्य विकारों से संबंधित होता है।

बोस्टन विश्वविद्यालय द्वारा जारी किए गए एक वक्तव्य के मुताबिक शोधकर्ताओं ने 12 सप्ताह तक स्वस्थ लोगों के दो समूहों का अध्ययन किया।

एक समूह ने सप्ताह में प्रत्येक दिन एक घंटे तक योग का अभ्यास किया जबकि दूसरे समूह के लोग इतने ही समय के लिए केवल टहले।

इसके बाद 'मैग्नेटिक रीजोनेंस स्पेट्रोस्कोपी' (एमआरसी) के जरिए मस्तिष्क के चित्र लिए गए।

शोधकर्ताओं ने 12वें सप्ताह में दोनों समूहों के जीएबीए स्तर की तुलना की। दोनों समूह के प्रत्येक व्यक्ति से अध्ययन की विभिन्न अवस्थाओं में अपनी मानसिक अवस्था का आंकलन करने के लिए भी कहा गया।

यह देखा गया जिन लोगों ने योगाभ्यास किया उनमें पैदल चलने या टहलने वाले लोगों की अपेक्षा चिंता का स्तर कम हुआ और उनके मनोभावों में सुधार देखा गया।

बोस्टन विश्वविद्यालय के शोधकर्ता क्रिस स्ट्रीटर कहते हैं कि योगाभ्यास को कई मानसिक विकारों की बेहतर चिकित्सा के रूप में देखा जाता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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