परमाणु विधेयक रिपोर्ट संसद में पेश होगी

समाचार एजेंसी पीटीई के अनुसार परमाणु दुर्घटना की स्थिति में मुआवज़े की राशि में तिगुनी बढ़ोत्तरी करते हुए सरकार ने इसे 500 से बढ़ा कर 1500 करोड़ रुपए तक कर दिया है. इस विधेयक पर विवाद को सुलझाने के लिए बनाई गई संसदीय समिति ने भी मुआवज़े की राशि बढ़ाए जाने को कहा है. ख़बरें हैं कि समिति विपक्षी दलों की ज़्यादातर मांगों पर आम सहमति बनाने में कामयाब हो गई है. हालांकि वाम दल अब भी इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं.
सरकार चाहती है कि नवंबर में अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा से पहले ये विधेयक पारित हो जाए. संसद में इस विधेयक के पास होने के लिए भाजपा का समर्थन ज़रूरी है क्योंकि राज्यसभा में सरकार के पास बहुमत नहीं है. विज्ञान और प्रौद्योगिकी मसलों पर विचार के लिए बनाई गई स्थाई समिति ने भी अपनी अंतिम रिपोर्ट में विपक्षी दलों की मांगों के मद्देनज़र परमाणु जवाबदेही विधेयक में कुछ बदलावों के सुझाव दिए थे.
इसके पहले विपक्षी दलों ने इस बात पर भी चिंता जताई थी कि इस विधेयक के क़ानून बनने के बाद परमाणु दुर्घटना होने की स्थिति में विदेशी कंपनियां आसानी से अपनी जवाबदेही से बच निकलेंगी. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) अब भी इस विधेयक के कुछ हिस्सों को लेकर नाखुश हैं.
स्थाई समिति के अध्यक्ष सुब्बीरामी रेड्डी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा,'' सदस्यों ने जो भी बदलाव सुझाए थे, उन पर खुलकर बातचीत की गई और इसके बाद विधेयक में ज़रूरी बदलाव किए गए हैं. ये विधेयक जनता के हित में होगा.'' मई में भारी हंगामे के बीच ये विधेयक लोकसभा में पेश किया गया था. तब भाजपा ने इस विधेयक के विरोध में लोकसभा से वॉकआउट किया था.
इसके पहले मार्च में भी इस विधेयक को पेश करने की कोशिश की गई थी तब समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव और राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने इसका विरोध किया था, हालांकि मई में ये दोनों सरकार के साथ दिखाई दिए थे.












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