रैगिंग मामले में काचरू के पिता अदालत में पेश होंगे
त्वरित अदालत के न्यायाधीश पुरिंदर वैद्य ने बुधवार को अभियोजन पक्ष के वकील को पीड़ित के रूप में राजेंद्र काचरू से जिरह की अनुमति दे दी। बताया जाता है कि अमन काचरू ने रैगिंग की घटना से पूर्व रैगिंग के संबंध में अपने पिता से कई बार चर्चा की थी।
विशेष सरकारी वकील जीवन लाल शर्मा ने आईएएनएस को बताया कि राजेंद्र काचरू से जिरह इसलिए जरूरी है, क्योंकि अमन के कमरे में साथ रह रहे आशीष सकलानी ने अदालत को बताया कि पीड़ित छात्र ने रैगिंग की घटना के बारे में अपने पिता से कई बार बात की थी।
शर्मा ने कहा कि अदालत ने बुधवार को दो चिकित्सकों- हरजीत पाल सिंह (नाक, कान, गला विभाग के निबंधक) एवं डीपी स्वामी (फॉरेंसिक चिकित्सा विभाग के सहायक प्रोफेसर) के फिर से जिरह अनुमति भी दी।
उन्होंने बताया, "दोनों के दर्ज बयान में कुछ अस्पष्टता पाई गई है। इसलिए भ्रांति दूर करने के मकसद से हमने अदालत से फिर से जिरह की मांग की थी।"
सिंह उस समय अस्पताल में ड्यूटी पर थे, जब रैगिंग की घटना के कुछ घंटों बाद अमन के कानों की जांच की गई थी। वहीं स्वामी ने अमन के शव का पोस्टमार्टम किया था।
दोनों चिकित्सकों को सम्मन भेजकर 27 अगस्त को अदालत में बुलाया गया है।
अमन (19) की मौत आठ मार्च 2009 को कालेज के अंतिम वर्ष के चार छात्रों द्वारा कथित तौर पर रैगिंग किए जाने के कुछ ही घंटों बाद हो गई थी।
इस मामले में अदालत में चिकित्सकों एवं पुलिसकर्मियों सहित अब तक 37 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं।
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद आत्मसमर्पण करने वाले चार आरोपियों के खिलाफ दायर मुकदमे की सुनवाई अदालत ने दो अगस्त को शुरू की। ये चार आरोपी हैं- अजय वर्मा, नवीन वर्मा, अभिनव वर्मा एवं मुकुल शर्मा।
उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय ने निचली अदालत द्वारा 17 जुलाई को चारों आरोपियों को दी गई जमानत को कानून के विरुद्ध बताते हुए खारिज कर दिया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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