गंदगी से बदसूरत हुआ ताज गलियारा

आगरा, 18 अगस्त (आईएएनएस)। देश में विवादास्पद रहा 80 एकड़ क्षेत्र में फैला ताज गलियारा अब कचड़ा और शव फेंकने के एक स्थल के रूप में तब्दील होकर केवल आंख की किरकिरी बनकर रह गया है।

गलियारे की इस बदहाली है लिए विभिन्न सरकारी एजेंसियां केवल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रही हैं।

दो विश्व विरासत स्मारकों ताजमहल और आगरा के किले के बीच फैले इस क्षेत्र में अब पशुओं के शव, कब्र और मलबे का ढेर है जो मच्छरों, कुत्तों, सांपों, कौवों और गिद्धों को आमंत्रण देता है। आगरा के राष्ट्रमंडल खेल पर्यटकों का मेजबान शहर बनने की उम्मीद के बावजूद इस बदसूरती के प्रति उदासीनता दिखाई दे रही है।

गलियारा बनाने की महत्वाकांक्षी योजना उस वक्त अधर में ही टंगी रह गई थी जब इसके विकास से 17वीं सदी में स्थापित हुए ताजमहल को नुकसान पहुंचने की आशंका से 2003 में इसके खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किए गए। अब यह मुद्दा सर्वोच्च न्यायालय के अधीन है, जिसने इस क्षेत्र में किसी भी नए निर्माण पर पाबंदी लगा दी है।

विभिन्न अधिकारियों के पास इस क्षेत्र की साफ-सफाई को लेकर कई याचिकाएं और मांगें प्रस्तुत की गई हैं।

'ब्रज मंडल हेरीटेज कंजरवेशन सोसायटी' के अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा कहते हैं, "वे सभी अदालत के आदेश के आगे खुद को असहाय बताते हुए समस्या को यहां से वहां आगरा विकास प्राधिकरण से उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग, वहां से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की ओर उछाल रहे हैं।"

उन्होंने कहा कि दिल्ली में अक्टूबर में आयोजित होने वाले खेलों से पहले अधिकारियों को कम से कम वहां सफाई करने की कोशिश तो करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह ऐसा समय होगा, जब आगरा में अन्य दिनों में आने वाले औसतन 7,500 पर्यटकों से ज्यादा पर्यटक आएंगे।

आगरा की मेयर अंजुला सिंह माहौर कहती हैं कि जब तक इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय का अंतिम आदेश नहीं आ जाता, तब तक केंद्र सरकार की एजेंसियों की वहां स्वच्छता सुनिश्चित करने और लोगों को गलियारा में गंदगी फैलाने से रोकने की जिम्मेदारी है।

एएसआई ने मलबे को हटाने के लिए कोष की मांग की है लेकिन कोष नहीं मिला है। बाद में सुझाव दिया गया कि उत्तर प्रदेश वन विभाग वहां पेड़-पौधे लगाए लेकिन संसाधनों की जरूरतों के चलते यह परियोजना आगे नहीं बढ़ी है।

गौरतलब है कि मायावती सरकार ने 2003 में ताजमहल को चार महत्वपूर्ण स्मारकों आगरा का किला, इतमाद-उद-दौला, चीनी-का-रोजा और रामबाग से जोड़ने के लिए 175 करोड़ की ताज गलियारा योजना शुरू की थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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