भाजपा ने कश्मीरी युवकों से वार्ता की, शांति पर जोर (लीड-1)
भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी शोध फाउंडेशन (एसपीएमआरएफ) द्वारा आयोजित संवाद का उद्घाटन किया।
एसपीएमआरएफ के एक प्रवक्ता ने आईएएनएस को बताया कि कश्मीर विश्वविद्यालय, इस्लामिक युनिवर्सिटी फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी और महाविद्यालयों के लगभग 60 छात्र संवाद में हिस्सा ले रहे हैं। छात्रों के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व इस्लामिक विश्वविद्यालय के कुलपति सिद्दीक वाहिद कर रहे हैं।
उद्घाटन संबोधन में गडकरी ने कहा कि जम्मू एवं कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है। "इस मुद्दे पर कोई सौदेबाजी नहीं हो सकती। कश्मीर की स्थिति से जुड़े अन्य किसी भी मुद्दे पर हम बात करने के लिए तैयार हैं।"
गडकरी ने कहा, "कश्मीर घाटी में वर्तमान हालात में किसी राजनीतिक संवाद को आकार देने के लिए आवश्यकता इस बात की है कि लोग हिंसा को त्यागें।"
गडकरी ने कहा कि कश्मीर की समस्या का वास्तविक समाधान वहां के युवकों को शिक्षित करने और क्षेत्र में व्यापक आर्थिक सुधारों को सुनिश्चित कराने में छिपा हुआ है।
गडकरी ने कहा कि जम्मू एवं कश्मीर की विस्फोटक स्थिति से पूरा देश चिंतित है। वहां शांति-व्यवस्था बहाल करने और पाक समर्थित आतंकवादियों तथा अलगाववादियों को सख्ती से कुचलने की तत्काल आवश्यकता है।
गडकरी ने आगे कहा कि घाटी में चल रहे घटनाक्रम से साफ दिखता है कि प्रदेश सरकार स्थिति संभालने में असफल हो चुकी है। केन्द्र सरकार भी समस्या का समाधान ढूंढने में असहाय दिख रही है। उसे सूझ नहीं रहा कि समाधान के लिए क्या कदम उठाया जाए। पूरा देश केन्द्र सरकार से समस्या के समाधान की आस लगाए बैठा है।
एसपीएमआरएफ के निदेशक तरुण विजय ने कहा कि कश्मीर में शांति स्थापना पर दिल्ली में पहली बार आम चर्चा आयोजित की गई है। इसमें भाग लेने वाले अधिकांश लोग कश्मीर विश्वविद्यालय और इस्लामिक विश्वविद्यालय के छात्र हैं। विस्थापित कश्मीरी पंडितों के प्रतिनिधियों ने भी संवाद में हिस्सा लिया।
विजय ने कहा, "आने वाले दिनों में कश्मीरी युवक विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्र का नेतृत्व करेंगे।"
एसपीएमआरएफ द्वारा जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार संवाद में हिस्सा लेने आए भागीदारों ने गृह मंत्री पी.चिदंबरम से भी मुलाकात की।
विजय ने कहा कि कश्मीरी युवक लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज और विभिन्न पार्टियों के युवा सांसदों से बुधवार को बातचीत करेंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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