लेह विस्थापितों के घर ढाई में बनाए जाएंगे : प्रधानमंत्री (लीड-3)
एक दिवसीय दौरे पर यहां आए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस प्राकृतिक आपदा में तबाह हुए घरों को ढाई माह के अंदर बनवा दिया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने कहा, "बादल फटने के कारण अचानक हुए जान-माल के त्रासदपूर्ण नुकसान की खबर सुनकर मुझे गहरा सदमा लगा था।"
पीड़ितों के प्रति अपनी सहानुभूति जाहिर करते हुए सिंह ने कहा, "जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है, मैं तह-ए-दिल से उन सभी के साथ हूं। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि दुख की इस घड़ी में वह उन्हें हिम्मत प्रदान करे।"
सिंह ने कहा कि वह पहले ही लेह का दौरा करना चाहते थे, लेकिन ऐसा इसलिए नहीं कर पाए, क्योंकि राहत एवं बचाव कार्य प्रभावित होता।
प्रधानमंत्री ने कहा, "अस्पताल, स्कूल, बिजली के कनेक्शन और सड़क फिर से निर्मित किए जाएंगे और सभी पुनर्वास कार्य सर्दी शुरू होने से पहले ढाई महीने के अंदर पूरे कर लिए जाएंगे। इसके लिए धन की कोई समस्या नहीं होगी।"
मंगलवार सुबह एक दिवसीय दौरे पर लेह पहुंचे प्रधानमंत्री ने कहा कि यह राशि प्रधानमंत्री राहत कोष से दी जाएगी। प्रधानमंत्री ने बाढ़ पीड़ितों के लिए निर्मित एक राहत शिविर का भी दौरा किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार आपदा से प्रभावित परिवारों की मदद के लिए हर संभव कदम उठाएंगी।
मनमोहन सिंह ने लोगों के लिए विभिन्न योजनाओं का प्रभावी तरीके से कार्यान्वयन सुनिश्चित कराने के लिए राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक निगरानी समिति की भी घोषणा की।
सिंह ने वादा किया, "ठंड शुरू होने से पहले मैं दोबारा आप लोगों से मिलने आऊंगा और आप लोगों के लिए तैयार किए गए घरों का निरीक्षण करूंगा।"
प्रधानमंत्री ने इसके पहले आपदा में मारे गए लोगों के परिजनों के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से 100,000 रुपये और घायलों के लिए 50,000 रुपये अनुग्रह राशि की घोषणा की थी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 125 करोड़ रुपये के राहत पैकेज के अलावा तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए लेह तथा कारगिल स्वायत्तशासी हिल विकास परिषदों को अलग-अलग पांच करोड़ रुपये के अनुदान दिए गए हैं। यह धनराशि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से विशेष पैकेज के तहत प्रदान किए जाएंगे।
प्रधानमंत्री ने लद्दाख में आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए प्रत्येक मकान के लिए 100,000 रुपये तथा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए मकान के लिए 200,000 रुपये की सहायता की भी घोषणा की।
प्रधानमंत्री ने आपदा पीड़ितों की मदद करने में जुटे सेना, वायुसेना, सीमा सड़क संगठन (बीआरओ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) के जवानों की उनके अथक प्रयासों के लिए प्रशंसा की।
प्रधानमंत्री के साथ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद, केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री फारूक अब्दुल्ला और राज्य कांग्रेस अध्यक्ष सैफुद्दीन सोज भी थे। कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी और रक्षा राज्य मंत्री एम.एम.पल्लम राजू ने सोमवार को इलाके का दौरा किया था।
स्वतंत्रता दिवस पर अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने कहा था कि लेह के बाढ़ पीड़ितों को राहत देने और उनके पुनर्वास के सभी प्रयास किए जाएंगे।
लोकसभा में सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री पी.चिदंबरम ने एक बयान में कहा कि थल सेना, वायु सेना, सीमा सड़क संगठन, राष्ट्रीय आपदा राहत बल और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के करीब 6,000 जवान राहत कार्यो में नागरिक प्रशासन की मदद कर रहे हैं।
लेह कस्बे और आसपास के इलाकों में छह अगस्त की रात बादल फटने की घटना से भारी तबाही हुई। इसमें छह विदेशी नागरिकों सहित कम से कम 179 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 200 लोग अभी भी लापता हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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