ब्लैकबेरी विवाद से दुविधा में हैं उपभोक्ता
नई दिल्ली, 16 अगस्त (आईएएनएस)। एक ही उपकरण से ई-मेल, मैसेंजर, एसएमएस और वॉयस मैसेज का उपयोग कर सकने के लिए अपने पहले वेतन से एक ब्लैकबेरी फोन खरीदना चाह रहीं कंप्यूटर कंपनी डेल के कार्पोरेट संचार दल की सदस्य प्रियंका पंत (24 वर्ष)अब दुविधा में हैं।
सरकार ने कनाडा की कंपनी रिसर्च इन मोशन (आरआईएम) को अपने स्मार्टफोन के सर्वर तक सुरक्षा एजेंसियों को पहुंच उपलब्ध कराने के लिए 31 अगस्त तक की समय सीमा तय की है।
पंत ने आईएएनएस से कहा, "मैं हमेशा एक ब्लैकबेरी खरीदना चाहती थी। मैं अपने पहले वेतन से इसे खरीदने का फैसला किया। अब इस पर प्रतिबंध और अन्य बातों के बाद मुझे बताया गया है कि नोकिया ई-सर्विस हैंडसेट एक बेहतर विकल्प है।"
सरकार ब्लैकबेरी की एन्क्रिप्टेड सेवाओं से देश की आंतरिक सुरक्षा को पैदा जिस खतरे को देख रही है उससे देश के युवा बेखबर नहीं है, क्योंकि एन्क्रिप्टेड संदेशों का आंतकवादी या विद्रोही संगठन दुरुपयोग कर सकते हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय की एक छात्रा अनुप्रिया सिंह (21 वर्ष) ने कहा कि कोई भी एक और 26/11 नहीं चाहता है। सरकार को आंकड़े उपलब्ध कराए जाने चाहिए। देश की सुरक्षा के साथ समझौता भयावह होगा।
इसके साथ ही सिंह ने कहा, "परंतु मुझे यह भी नापसंद है कि कोई मेरी जासूसी करे। सरकार क्यों नहीं आश्वासन देती कि मेरी बातचीत, चैट, ई-मेल और एसएमएस संदेशों में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। मुझे यह जानने का हक है।"
साइबरमीडिया के सूचना और संचार प्रौद्योगिकी प्रकाशन के मुख्य संपादक प्रशांत के.रॉय ने कहा कि न तो गृह मंत्रालय और न ही दूरसंचार मंत्रालय केंद्रीय विषय पर ध्यान दे रहा है।
इस विवाद के बाद से अब उन लोगों ने अन्य विकल्पों पर विचार करना शुरू कर दिया है जिनके पास पहले से ब्लैकबेरी है या जो इसको खरीदने की इच्छा रखते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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