संस्थाओं में भ्रष्टाचार समाप्त करना होगा : कपाड़िया (लीड-1)

नई दिल्ली, 15 अगस्त (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश एस. एच. कपाड़िया ने 64वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर रविवार को कहा कि गहरे तक जड़ जमा चुकी भ्रष्टाचार की समस्या से लड़ने के लिए संस्थानिक नैतिकता और अखंडता को पुनस्र्थापित करना होगा।

कपाड़िया ने कहा, "हम भ्रष्टाचार की चुनौती का सामना कर रहे हैं। चाहे वह सर्वोच्च न्यायालय हो, उच्च न्यायालय हो या कोई भी संवैधानिक संस्था, सभी जगह संस्थागत नैतिकता और अखंडता को पुनस्र्थापित करने की जरूरत है।"

कपाड़िया स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सर्वोच्च न्यायालय बार एसोसिएशन (एससीबीए) द्वारा आयोजित एक समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि समेकित विकास के तमाम विचारों के बावजूद अमीर और गरीब के बीच भारी असमानता बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि यह बड़ा विरोधाभास है कि एक ओर जहां भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, वहीं दूसरी ओर यहां टीवी और मधुमेह से पीड़ित लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है। मानव विकास सूचकांक में भारत 134 वें स्थान पर है। दुनिया के 40 करोड़ सबसे ज्यादा गरीब भारत में रहते हैं।

कपाड़िया ने कहा कि सार्वभौमिक दया से पूर्ण और समतावादी व्यवस्था का निर्माण आवश्यक है। उन्होंने कहा, "मेरा स्वप्न मौजूदा व्यवस्था के अंतर्गत इन लक्ष्यों को प्राप्त करना है।"

कपाड़िया ने कहा कि इस गृष्मावकाश के दौरान पिछले गृष्मावकाश की बनिस्बत दोगुने मामलों का निपटारा किया गया। उन्होंने कहा कि पिछले महीने लंबित मामलों की संख्या 1,000 मामलों तक नीचे आ गई।

एससीबीए के अध्यक्ष राम जेठमलानी ने समारोह में कहा कि राष्ट्रीय ध्वज आंतरिक स्वतंत्रता और बाहरी संप्रभुता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस का समारोह रूढ़िवादी नहीं होना चाहिए, स्वतंत्रता की खुशी को लोगों के चेहरों में तलाशा जाना चाहिए।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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