असली शरणार्थियों को ही स्वीकार करेंगे : कनाडा

कनाडा में लगभग तीन लाख श्रीलंकाई लोग बसे हुए हैं और उससे जुड़े कनाडा के एक वकील गैरी आनंदसांगरी ने बीबीसी को बताया कि ये लोग श्रीलंका में सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे थे और इसीलिए वहाँ से किसी अन्य देश में जाना चाहते थे. इनमें बढ़ी संख्या में महिलाएँ और बच्चे हैं जो तीन महीने का सफ़र करने के बाद एक मालवाहक जहाज़ के ज़रिए वहाँ पहुँचे हैं. सुरक्षाकर्मियों के साथ कनाडा के अनेक अधिकारी वैंकूवर में पहुँचे लोगों की जाँच कर रहे हैं.
जहाँ इन लोगों को अस्पताल और निगरानी वाली अन्य जगहों पर पहुँचाने के लिए बसों और एंबुलेस का इंतज़ाम किया गया है वहीं अधिकारियों ने ऐसी शंका भी जताई है कि इनमें से कुछ लोग तमिल विद्रोही भी हो सकते हैं. कनाडा एलटीटीई को 'आतंकवादी' संगठन मानता है. कनाडा के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री विक टोव्स का कहना है कि मालवाहक जहाज़ एमवी सन सी ने बताया है 'जहाज़ पर 490 शर्णार्थी हैं लेकिन इनमें संदिग्ध मानव तस्कर और आतंकवादी भी हो सकते हैं.'
कनाडा में श्रीलंका के उच्चायुक्त चित्रांगानी वागीस्वारा ने कनाडा से अनुरोध किया है वह एमवी सन सी से आए यात्रियों के शरण लेने के दावे को ख़ारिज कर दे. कनाडा के अधिकारियों का कहना है कि वे इस बात की पुष्टि करना चाहते हैं कि क्या ये लोग तमिल समुदाय के हैं. पिछले साल तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई और श्रीलंकाई सेना के बीच युद्ध ख़त्म हुआ था जिसमें अनेक एलटीटीई लड़ाके और अन्य तमिल मारे गए थे.












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