वीजा कानून का भारत से सबंधों पर असर नहीं: अमेरिका
वाशिंगटन, 14 अगस्त (आईएएनएस)। अमेरिका को उम्मीद है कि अमेरिका-मेक्सिको सीमा को सुरक्षित करने के लिए 60 करोड़ डॉलर की रकम उगाहने के उद्देश्य से कार्य वीजा शुल्क बढ़ाने के नए कानून से भारत और अमेरिका के तेजी से बढ़ते संबंध प्रभावित नहीं होंगे।
अमेरिका की आंतरिक सुरक्षा मंत्री जेनेट नेपोलिटानो ने शुक्रवार को संवाददाताओं से कहा, "मेरे विचार से प्रशासन के भारत के साथ बहुत मजबूत संबंध हैं और हमें इसके बने रहने की उम्मीद है।"
इस नए कानून से भारत की आईटी कंपनियों और आउटसोर्सिग उद्योग के बहुत अधिक प्रभावित होने की आशंका है।
अमेरिका-भारत व्यापार परिषद के इस कानून को भेदभावपूर्ण बताने और इससे भारत-अमेरिका आर्थिक संबंध प्रभावित होने की आशंका जताने के बारे में पूछे जाने पर नेपोलिटानो ने कहा, "मैं नहीं सोचती कि ऐसा होगा।" परिषद में अमेरिका की शीर्ष 300 कंपनियां शामिल हैं।
भारत और अमेरिका के व्यापार जगत की चिंताओं को दरकिनार करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने शुक्रवार को इस कानून पर हस्ताक्षर किए। इसके तुरंत बाद नेपोलिटानो ने कहा, "मेरा मानना है कि अमेरिका और भारत के बीच मजबूत और व्यापक संबंध हैं तथा इस विधेयक से उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।"
सीनेट के संक्षिप्त संस्करण में ऐसी कंपनियों की सूची में विप्रो, टाटा, इंफोसिस और सत्यम का नाम ऐसी कंपनियों के रूप में दर्ज किया गया है जो हजारों कर्मचारियों को अमेरिका में अपने ग्राहकों के लिए तकनीकी कर्मियों और इंजीनियर के तौर पर काम करने के लिए भेजती हैं।
नए उपायों के तहत जिन कंपनियों में एच-1बी वीजा धारक कर्मचारियों की संख्या 50 प्रतिशत से अधिक है उन्हें कुशल पेशेवरों के प्रति वीजा के लिए अब 320 डॉलर के स्थान पर 2,320 डॉलर का भुगतान करना होगा। इसी प्रकार बहु-देशीय स्थानांतरण वाले एल वीजा के लिए 320 डॉलर के स्थान पर 2,570 डॉलर शुल्क चुकाना होगा।
नए विधेयक के अनुसार 1,500 नए सीमा रक्षकों की भर्ती, दो मानव रहित जासूसी विमान (ड्रोन) और उनके लिए सैन्य ढंग के आधार शिविर बनाए जाने हैं। इस कार्य में व्यय होने वाले 60 करोड़ डॉलर की रकम का अधिकांश हिस्सा अमेरिकी वीजा नियमों का दुरुपयोग कर पेशेवरों को अमेरिका लाने वाली विदेशी कंपनियों से वीजा शुल्क में वृद्धि करके वसूला जाने वाला है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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