'राजनीति को 'दुकान' की तरह चलाने वालों से मुक्ति की आवश्यकता'
सूचना के अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता सुभाषचंद्र अग्रवाल ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर लिखे एक लेख में यह बात कही है।
अग्रवाल ने लिखा है, "निजी हित साधने वाले राजनेताओं से मुक्ति मिलने के बाद भ्रष्टाचार और अपराध जैसी कई बुराईयों से अपने आप ही स्वतंत्रता मिल जाएगी।"
लेख में कहा गया है, "हम उस प्रणाली से स्वतंत्रता चाहते हैं जो अरुणा रॉय और अरविंद केजरीवाल जैसे प्रतिभाशाली लोगों को राजनीति से दूर रखती है और सपने में भी राजनीति में उनके प्रवेश की इजाजत नहीं देती।"
अग्रवाल ने लिखा है, "ईमानदारी के आइकन माने जाने वाले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी लोकसभा (संसद का निचला सदन) चुनाव नहीं जीत सके थे। ऐसा इसलिए है क्योंकि मौजूदा व्यवस्था चुनाव में भ्रष्टाचार से कमाए गए अत्यधिक पैसे को खर्च करने वालों की मदद करती है।"
अग्रवाल का सुझाव है कि सदन के एक-तिहाई सदस्यों द्वारा नामांकित प्रतिनिधियों में से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री चुनने के लिए संसद व राज्य विधानसभाओं के सदस्यों को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के जरिए गुप्त और अनिवार्य मतदान करना चाहिए।
उन्होंने कहा, "इस तरह चुने हुए व्यक्ति को हटाने के लिए भी इसी प्रक्रिया का इस्तेमाल होना चाहिए लेकिन उसके स्थान पर किसी और व्यक्ति का इसी तरह नामांकन होना चाहिए। मुख्यमंत्रियों के साथ सदन के सभापति और उप-सभापतियों का भी इसी प्रकार चयन होना चाहिए।"
महिला आरक्षण विधेयक पर उन्होंने लिखा है, "महिला आरक्षण विधेयक के कानून बनने तक राजनीतिक दलों को निर्वाचन आयोग के नए फार्मूले के तहत एक तिहाई पार्टी टिकट महिलाओं को देना चाहिए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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