राष्ट्रपति का आह्वान, हिंसा का रास्ता छोड़ें नक्सली

चौसठवें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा, "एक दूसरे की बात सुनने से और एक दूसरे के आपसी नजरिए का आदर करने से तथा एक दूसरे को समझने से, हम अपने सामने मौजूद मुद्दों का समाधान ढ़ूंढ सकते हैं।"

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास के निरंतर प्रयासों की जरूरत पर बल देते हुए उन्होंने कहा, "उग्र विचारधाराओं के प्र्वतकों और वापमंथी उग्रवाद के हिमायतियों को हिंसा का रास्ता छोड़ देना चाहिए। मैं उनका आह्वान करती हूं कि नागरिक समाज के सभी सदस्य और सभी व्यक्ति आगे आकर इस दिशा में आगे बढ़ने में उन्हें सहयोग देंगे।"

आतंकवाद :-

आतंकवाद को विश्व की शांति, स्थिरता और सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा करार देते हुए राष्ट्रपति ने कहा, "इसे पराजित करने के लिए विश्व के सभी देशों को एकजुट होकर काम करना होगा। ताकि आतंकवादयिों का कहीं कोई आश्रय, प्रशिक्षण की जगह, कोई वित्तीय साधन, कोई ढांचागत सहायता न मिले और उनकी विचारधारा का कोई हिमायत न करने वाला हो।"

उन्होंने कहा, "विश्व में हिंसा और नफरत का कोई स्थान नहीं हो सकता। वास्तव में मनुष्य के रूप में हमारा जो साझा हित हैं, वे विघटनकारी ताकतों से कहीं ज्यादा मजबूत हैं। यदि विज्ञान और तकनीकी में तेज गति से विकास करने वाली इस शताब्दी को मानव द्वारा, मानवीय मूल्यों के साथ हासिल, शानदार उपलब्धियों की शताब्दी बनाना है तो दुनिया को विनाश का नहीं शांति का संदेश देना होगा।"

समावेशी विकास :-

राष्ट्रपति ने कहा, "हमारा सबसे पहला काम सभी का कल्याण सुनिश्चित करना है। इसी वजह से हमने अपने आर्थिक ढांचे के आधार के रूप में समावेशी विकास को अपनाया है और इसे सक्रियता से अमल में लाया जा रहा है।"

उन्होंने कहा, "हमारा कार्य तभी पूरा होगा जब कोई भी भूखा नहीं सोएगा, किसी को फुटपाथ पर सोना नहीं पड़ेगा और हर एक बच्चा स्कूल जाएगा। हम सभी को एक बार सोचना चाहिए कि एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में हम शिक्षा, दक्षता विकास, आवास, स्वास्थ्य, देखभाल और पोषण के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में किए जा रहे सरकार के प्रयासों में किस प्रकार अपना योगदान कर सकते हैं।"

लेह त्रासदी पर जताई संवेदना :-

लेह में बादल फटने की घटना में मारे गए लोगों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए पाटील ने कहा, "इस घटना में अपने प्रियजनों को खोने वाले, इसमें घायल होने वाले तथा जिनकी संपत्ति नष्ट हुई है, उन सभी के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करती हूं।"

बापू, नेहरू और विवेकानंद का उल्लेख:-

राष्ट्रपति ने अपने भाषण में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू और स्वामी विवेकानंद का जिक्र किया। उन्होंने कहा, "गांधीजी के विचार और उनका जीवन वास्तव में हमारी उस प्राचीन सभ्यता की विचारधारा की अभिव्यक्ति थे, जिसमें शांति और सौहार्द, अहिंसा और सत्य, गरिमा और करुणा जैसे मूल्यों को प्रमुख स्थान दिया जाता है। गांधीजी की विचारधारा का अभी भी गहरा प्रभाव है और विश्व में इसकी प्रासंगिकता बढ़ रही है।"

उन्होंने कहा, "पंडित नेहरू ने एक बार गांधी को भारत की एक ऐसी सनातन आत्मा बताया था, जिसने स्वतंत्रता की मशाल को जलाए रखा। स्वामी विवेकानंद ने भारत का उल्लेख एक ऐसी प्राचीन भूमि के रूप में की जिसे ज्ञान ने किसी दूसरे देश में जाने से पहले अपना घर बनाया।"

उन्नत तकनीक:-

राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि उन्नत तकनीकों में आगे बने रहने के लिए देश में सभी क्षेत्रों में अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहित करते हुए प्रयास किए जाने जरूरी हैं। उन्होंने कहा, "हमें भौतिक ढांचागत सुविधाओं के निर्माण में तेजी लानी होगी। हमें नई सड़कें, बंदरगाह, हवाई अड्डे, विद्युत परियोजनाओं की जरूरत है और हमें मौजूदा सुविधाओं में भी सुधार करना होगा।"

कृषि व उद्योग :-

पाटील ने कहा, "हमारे उद्याोगों को प्रगति करते रहना चाहिए। भारतीय कंपनियों को कुशल और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी बनने के प्रयास जारी रखने चाहिए। इनमें से कुछ पहले ही विदेशों में अपन उपस्थिति दर्ज करवा चुकी हैं।"

उन्होंने कहा, "दूसरी हरित क्रांति की दिशा में आगे बढ़ने के लिए हमारे कृषि क्षेत्र को नई दिशाओं और ताजा विचारों सहित पूर्णत: अलग चिंतन की जरूरत है ताकि कृषि क्षेत्र पैदावार, उत्पादकता और मुनाफा बढ़ सके। यह खाद्य सुरक्षा और कीमतों में स्थिरता के लिए बहुत आवश्यक है।"

राष्ट्रपति ने कहा, "कृषि को अलग-थलग नहीं रखा जाना चाहिए। इसे अर्थव्यवस्था के दूसरे क्षेत्रों के साथ जोड़ा जाना चाहिए। किसानों को उपभोक्ताओं से सीधे जोड़ने वाली कारगर वितरण व्यवस्था को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ताकि किसानों को अपने उत्पाद के लिए अधिक पैसा और उपभोक्ता को कम कीमत पर सामान पर मिल सके।"

शासन प्रणाली व सामाजिक मुद्दे :-

राष्ट्रपति ने कहा, "निर्धारित लक्ष्यों और उद्देश्यों का पूरा होना प्रभावी शासन प्रणाली पर निर्भर करता है। भ्रष्टाचार बिल्कुल भी सहन न करने और जन सेवा के उच्च मानदंडों को अपनाने से शासन प्रणालियों की कारगरता जरूर कायम होगी और विकास और तरक्की कई गुना तेजी से होगी।"

उन्होंने कहा, "भौतिकवाद के बढ़ने से एक दूसरे के प्रति संवेदनहीनता भी बढ़ रही है। मजबूत पारिवारिक संबंध कमजोर होते जा रहे हैं। सामाजिक जागरूकता में गिरावट आ रही है। कुछ सामाजिक बुराइयां जारी हैं। इसे बदलना होगा। आज फिर से नैतिक और सदाचार संबंधी नई चेतना को साथ लेकर नवीन सफलताएं प्राप्त करने का सबसे बढ़िया अवसर है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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