गैस त्रासदी पर कार्यपालिका ने पूरी सक्रियता नहीं दिखाई: चिदंबरम
नई दिल्ली, 12 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा है कि वर्ष 1984 की भोपाल गैस त्रासदी को लेकर कार्यपालिका ने पूरी सक्रियता नहीं दिखाई और ऐसे में इस मामले पर न्यायपालिका द्वारा पहल की गई।
राज्यसभा में भोपाल गैस त्रासदी पर हाल के घटनाक्रमों पर अल्पकालिक चर्चा के जवाब में चिदंबरम ने गुरुवार को कहा, "इस त्रासदी के बाद जिस तरह से कार्यपालिका की भूमिका में होनी चाहिए थी, वैसी नहीं रही। 1980 के आखिर और 90 की शुरुआत में इस त्रासदी के पीड़ितों को मुआवजा देने या फिर उन्हें न्याय दिलाने के संदर्भ में कार्यपालिका कई कदम उठा सकती थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ।"
उन्होंने कहा, "कार्यपालिका के पीछे हटने की स्थिति में अदालत की ओर से कई आदेश दिए गए। कार्यपालिका ने उन्हीं आदेशों के तहत कदम उठाए। कभी भी आगे आकर इस संबंध में कोई पहल नहीं की गई।"
'यूनियन कार्बाइड' के तत्कालीन प्रमुख वॉरेन एंडरसन के संदर्भ में चिदंबरम ने सर्वोच्च न्यायालय के एक आदेश का हवाला देते हुए कहा कि अदालती फैसले के बाद एंडरसन के खिलाफ मामला और भी कमजोर पड़ गया। उन्होंने कहा कि एंडरसन के प्रत्यर्पण के संदर्भ में जो कुछ भी प्रयास किए गए, उनमें सफलता नहीं मिली।
मौजूदा समय में सरकार की पहल का जिक्र करते हुए गृह मंत्री ने कहा, "हमने इस त्रासदी को लेकर कुछ सुझाव दिए हैं जो सरकार ने स्वीकार भी कर लिए हैं। इन सुझावों का क्रियान्वयन किया जा रहा है।"
गौरतलब है कि वर्ष 1984 में भोपाल की 'यूनियन कार्बाइड' की फैक्टरी से जहरीली गैस के रिसाव से हजारों लोग मारे गए थे। उस दौरान इस कंपनी का प्रमुख वॉरेन एंडरसन देश से बाहर अमेरिका जाने में सफल रहा था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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