ममता के बयान पर स्पष्टीकरण दें प्रधानमंत्री : जेटली
जेटली ने मंगलवार को शून्यकाल के दौरान इस मामले को उठाते हुए कहा, "किसी भी मुद्दे पर सरकार की सामूहिक जिम्मेदारी होती है। मंत्रिमंडल के हर सदस्य को इसी सामूहिक जिम्मेदारी का निर्वहन करना पड़ता है। परंतु एक मंत्री (ममता) ने सरकार की नीति के बिल्कुल उलट बयान दिया है, जिससे सरकार की नीति पर भी सवाल खड़े होते हैं।"
ममता का नाम लिए बगैर भाजपा नेता ने कहा, " उनकी जनसभा को नक्सलियों का समर्थन था। इसमें कई ऐसे लोग शामिल हुए थे जो कई वारदातों में वांछित हैं। केंद्रीय मंत्री (ममता) ने आजाद के मारे जाने को भी 'खून' करार दिया। दूसरी ओर केंद्र सरकार और आंध्र प्रदेश पुलिस इसे मुठभेड़ कह चुकी है।"
जेटली के वक्तव्य के बीच में ही तृणमूल नेता और केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री दिनेश त्रिवेदी ने उन्हें टोका और कहा कि नेता प्रतिपक्ष गलत तथ्य पेश कर रहे हैं। मंत्री द्वारा टोके जाने पर जेटली ने संसदीय नियमों का हवाला देते हुए आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, "दूसरे सदन (लोकसभा) का सदस्य होने की वजह से वह (त्रिवेदी) मुझे टोक नहीं सकते। यह जरूर है कि बतौर मंत्री वह मेरे बयान के बीच हस्तक्षेप कर सकते हैं। ऐसे में उनका हस्तक्षेप सरकार का पक्ष माना जाएगा।"
इसके साथ ही नेता प्रतिपक्ष ने कहा, "इन दिनों हर मामले पर प्रधानमंत्री (मनमोहन सिंह) चुप रहते हैं। उनकी चुप्पी से सवाल खड़े होते हैं। हमारी मांग है कि खुद प्रधानमंत्री इस मामले में सफाई दें और स्पष्ट करें कि उनका केंद्रीय मंत्री (ममता) के बयान पर क्या रुख है।"
ममता ने सोमवार को लालगढ़ में हुई एक जनसभा में पिछले महीने नक्सलियों के प्रवक्ता आजाद को 'मारने' के लिए अपनाए गए तरीके की निंदा की थी। उन्होंने कहा, "जो हुआ वह ठीक नहीं है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति आजाद ने विश्वास जताया था।"
गौरतलब है कि पुलिस का दावा रहा है कि नक्सलियों के तीसरे नंबर के नेता आजाद आंध्र प्रदेश के आदिलाबाद जिले के जंगलों में मुठभेड़ में मारा गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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