कश्मीर मुद्दे पर बातचीत के लिए तैयार हूं : प्रधानमंत्री (राउंडअप)

जम्मू एवं कश्मीर में हाल के हिंसक विरोध प्रदर्शनों पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पहली बार बयान दिया है। अपने आवास से लगे पंचवटी सभा केंद्र में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि कश्मीर मुद्दे के समाधान के लिए बातचीत एक लोकतांत्रिक ढांचे के अंदर आयोजित किया जाना चाहिए।

सिंह ने कहा, "मैं इस बात को मानता हूं कि समस्या की चाबी एक राजनीतिक समाधान ही है, जो कि अलगाव की भावना और भावनात्मक जरूरतों को पूरा कर सकती है। लेकिन यह केवल स्थायी आंतरिक और बाहरी संवाद के जरिए ही हासिल किया जा सकता है। हम इसके लिए तैयार हैं। हम अपनी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं व खाके के अंदर सभी मुद्दों पर बातचीत करना चाहते हैं।"

सिंह ने कश्मीर के युवकों से अपील की कि वे शांति बनाए रखें। उन्होंने कहा कि राजनीतिक प्रक्रिया तभी गति पकड़ सकती है, और परिणाम दे सकती है, जब वहां शांति कायम हो जाए।

प्रधानमंत्री ने कहा, "मैं मानता हूं कि तमाम सारे लोग सभी मुद्दों का कोई शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं। हमें इस बात को स्वीकर कर लेना चाहिए कि बार-बार का विरोध प्रदर्शन, चाहे वह हिंसक हो या अहिंसक, इस प्रक्रिया में रोड़ा ही अटकाएगा।"

इसके साथ ही सिंह ने घाटी में शांति के लिए एक भावुक अपील की और कहा कि वह उस पीड़ा, आक्रोश और हताशा को समझते हैं, जो युवकों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर रहा है।

सिंह ने कहा, "मैं जम्मू एवं कश्मीर के लोगों से आग्रह करता हूं कि वे शांति को एक मौका दें। राज्य और वहां के संस्थानों के पुनर्निर्माण के लिए कठिन परिश्रम करने की आवश्यकता है। हमें आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना चाहिए और रोजगार के अवसर सृजित करने चाहिए। हमें भौतिक और मानव संसाधन संबंधी अधोसंरचना को खड़ा करना चाहिए।"

ज्ञात हो कि महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व वाली राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने इस बैठक का बहिष्कार किया।

प्रधानमंत्री ने कहा, "मैं उस पीड़ा को महसूस कर सकता हूं और उस क्रोध व हताशा को समझ सकता हूं जो युवकों को कश्मीर की सड़कों पर उतरने को मजबूर कर रहा है। उनमें से तमाम ने अपने जीवन में हिंसा और लड़ाई के अलावा और कुछ देखा ही नहीं है।"

उन्होंने कहा, "आज मैं जम्मू एवं कश्मीर के लोगों के लिए उम्मीद की अपनी उस भावना को आपके साथ साझा करना चाहता हूं, जिसे मैंने लंबे समय से संजो कर रखा है।"

प्रधानमंत्री सिंह ने एक नई शुरुआत का आह्वान किया।

घाटी में 11 जून से जारी हिंसा के बाद अपने पहले बयान में प्रधानमंत्री ने युवकों के नाम एक अपील भी जारी की और कहा कि वे अपने स्कूलों व कॉलेजों में जाएं और अपनी पढ़ाई शुरू करें।

टेलीविजन पर प्रसारित उर्दू में दिए अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने कहा कि वह लोगों के दर्द और उनकी मायूसी को समझ सकते हैं।

एक नई शुरुआत के आह्वान के साथ प्रधानमंत्री ने कहा कि जम्मू एवं कश्मीर में बहुत कम तरक्की हुई है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जम्मू एवं कश्मीर में स्थानीय निकाय के चुनाव जल्द कराए जाने चाहिए। इसके साथ ही सिंह ने प्रशासन में लोकप्रिय भागीदारी बढ़ाने के आधार पर शांतिप्रिय राजनीतिक गतिविधि को पुनर्जीवित करने पर जोर दिया।

सिंह ने कहा, "मैं मानता हूं कि लोकतांत्रिक प्रशासन में लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए और जमीनी स्तर पर राजनीतिक सशक्तीकरण सुनिश्चित कराने के लिए स्थानीय निकाय चुनाव जल्द कराए जाने चाहिए।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार लोगों से फिर से संपर्क बहाल करने के राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का पूरा समर्थन करेगी।

सिंह ने कहा, "मैं मानता हूं कि लोगों तक पहुंचने की और जमीनी स्तर पर शांतिप्रिय राजनीतिक गतिविधि को पुनर्जीवित करने की आप सभी की जिम्मेदारी है।"

प्रधानमंत्री ने राजनीतिक पार्टियों के युवा शाखाओं को सक्रिय करने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इससे जम्मू एवं कश्मीर के युवकों की वैध आकांक्षाओं को पूरा करने में मदद मिलेगी।

मनमोहन सिंह ने स्वीकार किया कि जम्मू एवं कश्मीर के लिए सरकार के आर्थिक राहत पैकेज को राज्य में पूरी तरह महसूस नहीं किया गया। इसके साथ ही उन्होंने राज्य के लिए एक रोजगार योजना तैयार करने हेतु विशेषज्ञों के एक समूह का प्रस्ताव किया।

जम्मू एवं कश्मीर में करीब 300,000 बेरोजगार युवक हैं।

मनमोहन सिंह ने कहा, "मैं मानता हूं कि जम्मू एवं कश्मीर के लिए दिया गया भारी आर्थिक पुनर्निर्माण पैकेज को जमीनी स्तर पर पूरी तरह महसूस नहीं किया गया।"

उन्होंने कहा कि सरकार, राज्य सरकार के सहयोग से पुनर्निर्माण योजनाओं के क्रियान्वयन की रफ्तार को बढ़ाएगी।

सिंह ने कहा कि प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर सी.रंगराजन के नेतृत्व में राज्य के लिए एक रोजगार योजना तैयार करने हेतु एक विशेषज्ञ समूह गठित किया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस विशेष समूह के अन्य सदस्यों में इनफोसिस के प्रमुख एन.आर.नारायणमूर्ति, भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के मुख्य सलाहकार तरुण दास, कश्मीर में फेडरेशन चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष शकील कलंदर और पी.नंद कुमार शामिल होंगे।

इस समूह में जम्मू एवं कश्मीर सरकार का एक आधिकारिक प्रतिनिधि भी होगा।

मनमोहन सिंह ने कहा, "राज्य में रोजगार बढ़ाने के लिए यह समूह राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन के साथ चर्चा करेगा और तीन महीनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंप देगा।"

मनमोहन सिंह ने जम्मू एवं कश्मीर में सुरक्षा बलों को आतंकवाद से मुकाबले के लिए दिए गए विशेष अधिकार की समीक्षा करने का भी संकेत दिया। सिंह ने कहा कि उनकी सरकार इस मुद्दे पर राज्य के लोगों की भावनाओं से परिचित है।

सिंह ने कहा, "हम सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून के मुद्दे पर जनता की मौजूदा भावना को समझते हैं।"

अलगाववादियों सहित सभी राजनीतिक पार्टियां सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून की समीक्षा किए जाने के लिए केंद्र सरकार से आग्रह कर रही हैं। यह कानून सेना को अपनी कार्रवाई के लिए कानूनी बचाव मुहैया कराता है। लेकिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस कानून में किसी तरह के बदलाव के खिलाफ है।

मनमोहन सिंह ने कहा कि जम्मू एवं कश्मीर पुलिस को राज्य में कानून-व्यवस्था के हालात से निपटना होगा, उस राज्य को जो 1989 से ही एक अंतहीन अलगाववादी अभियान से जूझ रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा, "राज्य पुलिस को अपनी ड्यूटी के लिए विशेष अधिकार की आवश्यकता नहीं है। हम जम्मू एवं कश्मीर पुलिस के विस्तार व मजबूती की प्रक्रिया को गति देंगे ताकि वह स्वतंत्र रूप से और प्रभावी रूप से कम से कम समय के भीतर अपने कर्तव्य का निर्वहन कर सके।"

कठिन परिस्थिति में अति चुनौतीपूर्ण कार्य के लिए राज्य पुलिस और सुरक्षा बलों की सराहना करते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि पिछले कुछ सप्ताहों के दौरान उनमें से कई गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं।

अपने भाषण के शुरुआत में प्रधानमंत्री ने कश्मीर घाटी में हिंसक प्रदर्शनों और लद्दाख में बाढ़ के कारण हुई मौतों पर शोक जाहिर किया।

उन्होंने कहा, "कश्मीर घाटी में हिंसक प्रदर्शनों के दौरान जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है, मैं उनके प्रति पीड़ा महसूस करता हूं।"

बैठक शुरू होने के जम्मू एवं कश्मीर में हुई मौतों पर दो मिनट का मौन रखा गया।

बैठक में गृह मंत्री पी.चिदंबरम, वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और रक्षा मंत्री ए.के.एंटनी भी उपस्थित थे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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