अरब सागर में तेल रिसाव रोकने के प्रयास जारी (लीड-2)
मुंबई, 8 अगस्त (आईएएनएस)। पनामा की एक जहाज से अरब सागर में गिरे तेल कंटेनरों से अभूतपूर्व रिसाव रोकने के लिए प्रशासन ने रविवार को युद्धस्तर पर प्रयास शुरू कर दिया। यह जहाज मुंबई तट पर एक अन्य जहाज से टकरा गई थी।
एमएससी चित्रा शनिवार को सेंट किट्स में पंजीकृत एमवी खलीजिया-3 के साथ टकरा गई थी, जिसके कारण समुद्र में तेल बिखर गया।
एक अधिकारी ने बताया कि अब तक के इतिहास में समुद्र में भारत की ओर से सबसे बड़ा अभियान शुरू किया गया है। भारतीय तटरक्षक (आईसीजी) की पांच पोतों, एक हेलीकाप्टर और एक छोटे विमान को मुंबई तट पर भारी तेल रिसाव को रोकने के लिए सेवा में लगाया गया है।
इसके अलावा आईसीजी ने गोवा, जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट, तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम और अन्य एजेंसियों से अतिरिक्त प्रदूषण नियंत्रण संसाधनों को मांगा है।
अधिकारी के अनुसार, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड भी जरूरत पड़ने पर अपनी सेवाएं देने को तैयार हैं।
दुर्घटनाग्रस्त हुए पोत, एमएससी चित्रा पर दुर्घटना के समय 2,500 टन तेल लदा हुआ था। लेकिन अधिकारी इस पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया है।
जहाजों में टकराव के कारण एमएससी चित्रा समुद्र में बुरी तरह लुढ़क गई और बचाव दल के लोग नियमित अंतराल पर तेल के उन कंटेनरों की जांच कर रहे हैं, जो जहाज से समुद्र में गिर गए हैं।
एक अधिकारी ने कहा कि चूंकि कंटेनर अरब सागर में तैर रहे हैं, इस कारण वे उस क्षेत्र में आ-जा रहे पोतों के लिए खतरा बने हुए हैं। इसके साथ ही पोतों की आवाजाही पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।
इस बीच आईसीजी के पोतों -संकल्प, अमृत कौर, सुभद्रा कुमारी चौहान, कमला देवी और सी-145 - को आईसीजी के अभियान में लगाया गया है।
एक हेलीकाप्टर और एक छोटे विमान को तेल बिखराव को रोकने के लिए डिसपरसैंट के छिड़काव में लगाया गया है।
अधिकारी ने कहा कि अब तक लगभग 150 लीटर डिसपरसैंट को छिड़काव किया जा चुका है।
अधिकारी ने कहा, "बिखरे तेल को वर्तमान स्थिति में समेटना संभव नहीं है, क्योंकि नीचे चट्टानें हैं और मौसम व ज्वार की स्थिति प्रतिकूल है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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