.यहां कांवड़ का निर्माण करते हैं मुस्लिम परिवार

मेरठ, 8 अगस्त (आईएएनएस)। सावन के महीने में जिस कांवड़ को अपने कंधों पर रखकर शिवभक्त कावंड़िये जल लेकर बैजनाथ धाम जाते हैं उस कांवड़ का निर्माण उत्तर प्रदेश में मेरठ जिले के मुस्लिम परिवारों द्वारा किया जाता है। कांवड़ बनाने वाले मुस्लिम परिवार हालांकि यह काम व्यवसाय के तौर पर करते हैं लेकिन उनका कहना है कि इससे जो खुशी उन्हें मिलती है उसका मोल पैसे से नहीं लगाया जा सकता।

मेरठ शहर के पुराने मुहल्ले के करीब 100 मुस्लिम परिवार कम मुनाफा वाला व्यवसाय होने के बावजूद सालों से कांवड़ निर्माण का काम कर रहे हैं जिसका उपयोग हिन्दुओं द्वारा भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग पर जलाभिषेक करने के लिए किया जाता है।

पिछले 40 वर्षो से कांवड़ निर्माण का काम करने वाले स्थानीय निवासी सफीक हुसैन (65) ने आईएएनएस को बताया," वैसे तो हर कांवड़ की बिक्री में सिर्फ 20 से 25 रुपये का ही फायदा होता है, लेकिन हिंदू भाइयों के लिए कांवड़ बनाकर जिस खुशी का अनुभव हम करते हैं उसका मोल पैसे से नहीं लगाया जा सकता है।"

हुसैन कहते हैं, "हम मानते हैं है कि हम जो कांवड बनाते हैं उसे हिन्दू भाई लेकर अपने पवित्र धार्मिक स्थल बाबा बैजनाथ धाम की यात्रा करते हैं जिसका कुछ पुन्य हमें भी मिलता है।" पुराने मेरठ में घंटाघर, केले वाली गली, तीरगरान, होली मोहल्ला और गुदड़ी बाजार इलाकों में करीब 100 मुस्लिम परिवार कांवड का निर्माण का काम करते हैं।

केले वाली गली के दुकानदार जुम्मन बताते हैं कि कांवड़ के व्यवसाय में ज्यादा मुनाफा नहीं होता लेकिन उनका मकसद सिर्फ पैसा कमाना नहीं होता। हिंदू भाइयों की मदद के लिए हम यह काम करके अपने खानदान की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।

जुम्मन के मुताबिक कांवड़ का मूल्य 300 रुपये से होकर करीब 1,000 रुपये तक होता है। कांवड़ निर्माण के समय इसमें मूर्तियों के अलावा सजावट तथा गंगा जल रखने के लिए पर्याप्त स्थान होने का खास ख्याल रखा जाता है। साथ ही हम चाहते हैं कि कांवड का वजन का कम हो ताकि लंबी दूरी की यात्रा करते समय इसका ज्यादा बोझ कंधे पर न पड़े। जिस कांवड़ का जितना ज्यादा मूल्य होता है.उसमें उतनी ही अधिक सजावट होती है। सजावट कृतिम फूलों, चमकीले कागजों से की जाती है।

सावन के महीने (जुलाई-अगस्त) में शविभक्त हरिद्वार व अन्य पवित्र स्थानों से कांवड़ में गंगा जल भर कर पैदल यात्रा करते हुए वापस स्थानीय शिव मंदिरों में आकर शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं।

कांवड़ निर्माण में लगे मुसलमान कारीगर आम दिनों में सड़क पर ठेले, खाने पीने की दुकानें व अन्य छोटे मोटे व्यवसाय करते हैं। घंटाघर निवासी कांवड़ कारीगर मुस्तफा हुसैन कहते हैं कि वैसे तो हम लोग आम दिनों में दूसरा काम काज कर करके अपनी जीविका चलाते हैं, लेकिन सावन का महीना आने के करीब पंद्रह दिन पहले से हम सपरिवार कांवड़ निर्माण में जुट जाते हैं। पैसे के साथ-साथ हमें इससे काफी आत्म संतुष्टि भी मिलती है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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