तिब्बती निर्वासन में मनाएंगे लोकतंत्र की 50वीं वर्षगांठ
धर्मशाला (हिमाचल), 8 अगस्त (आईएएनएस)। पांच दशकों से अधिक समय से भारत में निर्वासित जीवन बिता रहे तिब्बती अंगीकृत भूमि पर अगले महीने लोकतंत्र की 50वीं वर्षगांठ मनाएंगे।
कर्नाटक के बिलाकुप्पे में एक से दो सितंबर तक इस संबंध में एक समारोह मनाया जाएगा। तिब्बती धर्मशाला से बाहर पहली बार विशाल आयोजन करने जा रहे हैं। बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा का निवास स्थान एवं निर्वासित तिब्बती सरकार का मुख्यालय धर्मशाला में है।
इस समारोह के मद्देनजर तिब्बती नेतृत्व की 26 से 31 अगस्त के बीच बैठक होगी, जिसमें विगत पांच दशकों में किए गए कार्यो की समीक्षा की जाएगी तथा समस्त भारत एवं विश्व में मौजूद निर्वासित तिब्बतियों की बस्तियों के भविष्य और काल्याण पर विमर्श किया जाएगा।
भारत, नेपाल, भूटान और कुछ पश्चिमी देशों में निर्वासित तिब्बतियों की 50 से अधिक बस्तियां हैं। भारत 100,000 से अधिक तिब्बतियों की गृहभूमि की तरह है।
तिब्बती नेताओं की बैठक में मंत्री, सांसद, तिब्बती युवा कांग्रेस (टीवाईसी) जैसी विभिन्न गैरसरकारी संस्थाओं (एनजीओ) के प्रतिनिधि शामिल होंगे, जिसमें निर्वासित लोगों के लिए कल्याण के साधनों जैसे- शिक्षा, स्वास्थ्य एवं विकास पर रोशनी डाली जाएगी। बैठक में लगभग 400 प्रतिनिधि भाग लेंगे।
बैठक में भाग लेने के लिए तिब्बती प्रतिनिधि अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, यूरोप एवं अन्य स्थानों से भी आएंगे। उम्मीद है कि अमेरिका, यूरोपीय संघ एवं अन्य देशों से लगभग 50 सांसद भी आएंगे।
भारत में मैसूर के निकट बिलाकुप्पे तिब्बतियों का सबसे बड़ा रिहायशी इलाका है। पहली बार तिब्बतियों का मुख्य आयोजन उनकी बस्तियों के बीच होने जा रहा है।
तिब्बती लोकतंत्र की 50वीं वर्षगांठ समारोह का आयोजन निर्वासित तिब्बती संसद, टिबेटन पीपुल्स डिप्टीज (एटीपीडी) की विधानसभा द्वारा किया जा रहा है। संसद दो सितंबर को दलाई लामा को स्वर्ण पदक देकर सम्मानित करेगी। लामा को तिब्बतियों का नेतृत्व करने तथा तिब्बती लोकतंत्र की स्थापना के लिए सम्मानित किया जाएगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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