सैन्य विशेषाधिकार कानून हटाने पर हो सकता है विचार : अब्दुल्ला (लीड-4)

लोकसभा में कश्मीर की स्थिति पर जताई गई चिंता के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अन्य केंद्रीय मंत्रियों के साथ करीब दो घंटे तक चर्चा के बाद अब्दुल्ला ने कहा कि कोई भी राजनीतिक या प्रशासनिक कदम उठाए जाने से पहले केंद्र और राज्य सरकार घाटी में सामान्य स्थिति बहाल करने को लेकर सहमत हैं।

अब्दुल्ला ने कहा, "प्रधानमंत्री के साथ मेरी विस्तृत बातचीत हुई। सामान्य स्थिति लाने के लिए हमने उठाए जाने वाले कदमों के बारे में चर्चा की।"

उन्होंने कहा, "जम्मू एवं कश्मीर की समस्या स्वाभाविक रूप से राजनीतिक है। किसी भी तरह के राजनीतिक या प्रशासनिक कदम उठाए जाने से पहले सामान्य स्थिति बहाल करना बहुत जरूरी है।"

जब उनसे पूछा गया कि वे कौन से कदम उठाए जा सकते हैं तो उन्होंने कहा कि वे सशस्त्र बल (विशेषाधिकार) कानून, जवानों की संख्या कम करने, नियंत्रण रेखा के पार गए युवकों के लिए पुनर्वास और वर्तमान समस्या के पीड़ितों के लिए वित्तीय सहायता पर विचार कर रहे हैं।

सशस्त्र बल (विशेषाधिकार) कानून के तहत सेना के पास कानूनी तौर पर कार्रवाई का अधिकार है और उसे न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती। यह कानून जम्मू एवं कश्मीर में जुलाई 1990 से लागू है।

इसके साथ ही अब्दुला ने राज्य के लोगों से हिंसा को खत्म करने की अपील करते हुए कहा कि वहां हो रहे विरोध प्रदर्शन 'नेतृत्वविहीन' हैं और उसे कोई व्यक्ति या समूह निर्देशित नहीं कर रहा है।

उन्होंने कहा, "मैं नहीं समझता कि घाटी में जो कुछ भी हो रहा है उसके पीछे किसी विशेष समूह या व्यक्ति का हाथ है।" उन्होंने कहा, "यद्यपि घाटी में कई ऐसे तत्व हैं लेकिन वहां जो कुछ भी हो रहा है उससे देखकर लगता है कि वह नेतृत्वविहीन है।"

इससे पहले केंद्र सरकार ने कश्मीर में जारी पथराव और प्रदर्शनों के लिए पाकिस्तान स्थित समूहों को जिम्मेदार ठहराया था।

प्रधानमंत्री आवास पर हुई इस बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी, केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम, रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी और विदेश मंत्री एस. एम. कृष्णा शामिल थे।

उमर ने कहा, "हिंसा के दौरान हमने अपनों को खोया है। प्रदर्शनकारी एक घटना के बाद प्रदर्शन करते हैं और हिंसा में एक और व्यक्ति की मौत हो जाती है। हिंसा के इस दुष्चक्र को निश्चित तौर पर रोकना होगा।"

उन्होंने घाटी के प्रदर्शनकारियों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि कानून को अपने हाथ में लेने वालों को परिणाम भुगतना पड़ेगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे सामान्य स्थिति बहाल करने में सरकार की सहायता करें। इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है।

इधर घाटी की स्थिति पर लोकसभा में विपक्षी सदस्यों ने चिंता जताई जिस पर चिदंबरम ने कहा कि वहां की स्थिति 'गंभीर' है और वह जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री के साथ चर्चा के बाद इस मसले पर बयान देंगे।

लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा, "बीते कुछ दिनों से कश्मीर में स्थिति चिंताजनक है। कल (रविवार) सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक भी हुई थी। हम सरकार से यह जानना चाहते हैं कि पूरी स्थिति क्या है और इस पर क्या कदम उठाए जा रहे हैं।"

इस मामले पर जनता दल (युनाइटेड) के अध्यक्ष शरद यादव ने कहा, "कश्मीर के हालात चिंताजनक हैं। मैं समझता हूं कि सरकार इस मामले को लेकर चिंतित है और ऐसे में हम भी पूरी स्थिति से अवगत होना चाहते हैं। हम इस मामले में सरकार का पूरा सहयोग करेंगे।"

कश्मीर के हालात पर समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता मुलायम सिंह यादव ने भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, "कश्मीर को लेकर बड़ी समस्या यह है कि अब तक कोई भी सरकार वहां के लोगों का विश्वास नहीं जीत पाई है। समस्या को हल करने के लिए हम सभी को कश्मीर के लोगों का विश्वास जीतना जरूरी है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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