झारखंड के नौकरशाह 'तानाशाह' हो गए हैं : कांग्रेस
रांची, 2 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड की प्रदेश कांग्रेस इकाई का आरोप है कि राज्य के राष्ट्रपति शासन में नौकरशाह तानाशाह हो गए हैं। साथ ही वह पूर्व मुख्यमंत्रियों को दी गई सुविधाएं वापस लेने पर भी नाराज है।
रांची से कांग्रेस सांसद और केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री सुबोध कांत सहाय ने कहा कि नौकरशाह 'बेकाबू' हो चुके हैं।
सहाय ने संवाददाताओं ने कहा, "बेहतर होता यदि निर्वाचित सरकार ऐसा कोई निर्णय लेती। नौकरशाहों नियंत्रण से बाहर हो चुके हैं और उन पर लगाम कसने की जरूरत है। "
कांग्रेस के अलावा उसकी गठबंधन सहयोगी झारखंड विकास मोर्चा-प्रजातांत्रिक (जेवीएम-पी) भी पूर्व मुख्यमंत्रियों की सुविधाएं वापस लिए जाने के राज्यपाल की सलाहकार परिषद के निर्णय से नाखुश है।
कांग्रेस और जेवीएम-पी ने मिलकर विधानसभा का चुनाव लड़ा था और दोनों पार्टियां सबसे बड़े चुनाव पूर्व गठबंधन के रूप में उभरी थीं। जेवीएम-पी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबू लाल मरांडी भी इस कदम से प्रभावित होने वालों में से हैं।
पूर्व मुख्यमंत्रियों को रांची में बंगला, वाहन और ईंधन के साथ-साथ निजी सुरक्षा प्राप्त है। पूर्व मुख्यमंत्रियों को इसके अलावा भी कई अन्य सुविधाएं प्राप्त हैं।
राष्ट्रपति शासन लागू होते ही अधिकारियों के स्थानांतरण और नियुक्ति को लेकर कांग्रेस नाराज है। झारखंड में पिछले दो महीनों के दौरान 300 से ज्यादा अधिकारियों के तबादले हो चुके हैं जिनमें 65 आईएएस और आईपीएस अधिकारी भी हैं।
शनिवार को कांग्रेस की कोर समिति की बैठक में इस मुद्दे को उठाया गया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप बालमुचू ने बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, "राज्य में अधिकारी तानाशाह हो गए हैं। आम लोग परेशान हैं और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। यदि जरूरी हुआ तो इस मुद्दे को हम ऊपर तक ले जाएंगे।"
प्रदेश कांग्रेस के महासचिव शैलेष सिन्हा ने आईएएनएस से कहा, "राष्ट्रपति शासन अधिकारियों के शासन के रूप में तब्दील हो गया है। झारखंड सूखे की मार झेल रहा है। धान की रोपाई में देरी हो रही है और सूखे की स्थिति से निपटने के लिए अधिकारियों ने अब तक कोई कदम नहीं उठाया है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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