कश्मीर में 2 और प्रदर्शनकारियों की मौत (लीड-1)
इसके साथ ही शुक्रवार से अब तक सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मरने वालों की संख्या बढ़ कर आठ हो गई है।
घाटी में कानून-व्यवस्था की स्थिति पिछले तीन दिनों से बिगड़ गई है। अधिकांश शहर और कस्बे हिंसक प्रदर्शनों से हिल उठे हैं और भीड़ पुलिस थानों, पुलिस शिविरों, वाहनों पर पथराव कर रही है और पकड़ में आ गए सुरक्षा कर्मियों की पिटाई कर रही है।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने यहां कहा कि दो मौतों की खबर फैलने के साथ ही प्रदर्शनकारियों ने कस्बे में स्थित एक राजस्व अधिकारी के कार्यालय के साथ उनके आवास पर हमला किया और उसे आग के हवाले कर दिया, एक स्थानीय अदालत के गार्ड रूम से हथियारों को लूट लिया, एक पुलिस अधिकारी पर हमला किया और एक पुलिस वाहन को आग के हवाले कर दिया।
अधिकारी ने कहा कि सैकड़ों की संख्या में हिंसक प्रदर्शनकारियों ने पंपोर पुलिस थाने पर हमला बोल दिया। यह पुलिस थाना पुलवामा जिले में स्थित है।
अधिकारी ने कहा, "सुरक्षा कर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज किया। लेकिन प्रदर्शनकारियों पर इसका असर नहीं हुआ। उसके बाद सुरक्षा बलों ने गोलीबारी शुरू कर दी। इस दौरान सात व्यक्ति घायल हो गए। गंभीर रूप से घायल नईम अहमद शाह (26) नामक एक प्रदर्शनकारी को इलाज के लिए तत्काल श्रीनगर ले जाया गया। वहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।"
एक अन्य गंभीर रूप से घायल प्रदर्शनकारी ने भी अस्पताल में दम तोड़ दिया। उसकी पहचान अहमद वानी (17) के रूप में हुई।
मृतकों को श्रद्धांजलि देने के लिए हजारों की संख्या में लोग जमा हो गए। घटना स्थल पर अतिरिक्त सुरक्षा बल पहुंच गए हैं।
पुलिस अधिकारी ने कहा, "पंपोर कस्बे में स्थिति अति तनावपूर्ण है।"
भीड़ ने गांदरबल, फ्रास्ताबल, बारसू, कादलबल और पंपोर में जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर पेड़ों को गिराकर अवरोधक खड़ा कर दिया है।
उधर, श्रीनगर में दो दिन पहले हुई हिंसा के बाद लगा कर्फ्यू रविवार को भी जारी रहा। अलगाववादियों ने लोगों की मौत के विरोध में पूरी घाटी में बंद का आह्वान किया है, इससे नागरिकों की मुसीबतें बढ़ गई हैं।
वाहनों पर लगे लाउडस्पीकरों के माध्यम से पुलिस पुराने शहर और नए इलाकों में लोगों से कर्फ्यू का पालन करने की अपील कर रही है।
घाटी में पिछले 55 दिनों से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। घाटी के अन्य शहरों में भी कर्फ्यू लागू होने की खबरें हैं।
कट्टर हुर्रियत नेता सैयद अली गिलानी ने कहा कि यदि उनको पैरोल पर रिहा किया गया तो वे रिहाई के आदेश का पालन नहीं करेंगे।
अलगाववादी नेता के एक करीबी सूत्र ने कहा, "गिलानी साहब ने अधिकारियों से कहा है कि यदि वे उन्हें रिहा करना चाहते हैं तो उनके खिलाफ लगाए गए जन सुरक्षा कानून को हटाया जाना चाहिए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications