हिंसा के बाद श्रीनगर में कर्फ्यू जारी

वाहनों पर लगे लाउडस्पीकरों के माध्यम से पुलिस पुराने शहर और नए इलाकों में लोगों से कर्फ्यू का पालन करने की अपील कर रही है।

पुराने शहर के एक निवासी ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहा कि कर्फ्यू और प्रतिबंध रोजाना की बात हो गए हैं। जिस दिन कर्फ्यू नहीं होता अलगाववादी बंद का आह्वान कर देते हैं।

उन्होंने कहा, "मेरी बेटी एक स्थानीय चिकित्सा महाविद्यालय से पढ़ाई कर रही है और उसकी परीक्षा एक बार फिर टल जाएगी।"

अधिकारियों का कहना है कि सर्वाधिक खराब स्थिति में कानून और व्यवस्था को लागू करने के लिए कर्फ्यू का सहारा लिया जाता है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि आम लोगों को कोई भी परेशान नहीं करना चाहता। अलगाववादियों ने विरोध प्रदर्शन, बंद और रैली का आह्वान किया है और उनका मूल उद्देश्य युवाओं को हिंसा के लिए भड़काना है।

रिपोर्टों में कहा गया है कि भीड़ ने जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर पेड़ों को गिराकर उसे कई जगह बंद कर दिया।

घाटी में पिछले 55 दिनों से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। घाटी के अन्य शहरों में भी कर्फ्यू लागू होने की खबरें हैं।

कट्टर हुर्रियत नेता सैयद अली गिलानी ने कहा कि यदि उनको पैरोल पर रिहा किया गया तो वे रिहाई के आदेश का पालन नहीं करेंगे।

अलगाववादी नेता के एक करीबी सूत्र ने कहा, "गिलानी साहब ने अधिकारियों से कहा है कि यदि वे उन्हें रिहा करना चाहते हैं तो उनके खिलाफ लगाए गए जन सुरक्षा कानून को हटाया जाना चाहिए।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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