मप्र में दवा परीक्षण पीड़ितों में मंत्री तक शामिल (लीड-1)
विधानसभा में दवा परीक्षण को लेकर आए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव की चर्चा के दौरान भार्गव ने आप बीती सुनाकर इस बात की पुष्टि कर दी कि प्रदेश में दवाओं का परीक्षण अरसे से जारी है। वहीं ध्यानाकर्षण का जवाब देते हुए स्वास्थ्य राज्यमंत्री महेंद्र हार्डिया ने शुक्रवार को घोषणा की कि मध्य प्रदेश में दवा परीक्षण (ड्रग ट्रायल) के मामले की सरकार जांच कराएगी।
पिछले दिनों इंदौर की एक समाजसेवी संस्था द्वारा आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो में दवा परीक्षण की एक शिकायत दर्ज कराई गई थी। इस शिकायत के आधार पर महाराजा यशवंतराव अस्पताल के सात चिकित्सकों के खिलाफ ईओडब्ल्यू ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
दवा परीक्षण का यह मामला शुक्रवार को विधानसभा में भी गूंजा। विधायक पारस जैन, सुदर्शन गुप्ता व यशपाल सिंह सिसौदिया द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण में कहा गया कि प्रदेश के सरकारी और निजी अस्पतालों में कई विदेशी कंपनियों द्वारा दवाओं का परीक्षण किया जा रहा है, लेकिन मरीजों को इस बात की जानकारी तक नहीं होती हैं। इस परीक्षण के एवज में मरीजों को किसी तरह का आर्थिक लाभ भी नहीं दिया जाता है।
विधायकों का आरोप है कि इस आशंका को नहीं नकारा जा सकता है कि इन परीक्षणों के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया से न तो मान्यता ली गई है और न ही वे क्लीनिकल ट्रायल रजिस्ट्री इंडिया से पंजीकृत भी नहीं हैं। यह सीधे तौर पर मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ है।
स्वास्थ्य राज्यमंत्री हार्डिया ने विधानसभा में घोषणा की है कि दवा परीक्षण मामले की चिकित्सा शिक्षा के प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर जांच कराएंगे। उन्होंने दवा परीक्षण के ध्यानाकर्षण का जवाब देते हुए कहा कि ऐलोपैथी दवाओं के विकास व विपणन की अनुमति प्राप्त करने के लिए दवा परीक्षण अनिवार्य है।
इंदौर के दवा परीक्षण मामले का जिक्र करते हुए हार्डिया ने कहा कि शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय इंदौर में तमाम दिशा निर्देशों के मुताबिक एथिक्स कमेटी बनी है।
उन्होंने बताया कि मरीजों से हिंदी में विस्तारपूर्वक सहमति पत्र भराया जाता है। इसके अलावा संभावित दुष्परिणामों से भी मरीजों को अवगत कराया जाता है। इसके बावजूद दुष्प्रभाव होने पर उपचार की व्यवस्था बीमा कंपनी द्वारा की जाती है। इतना ही नहीं मरीज व उसके परिजनों को इस बात की स्वतंत्रता होती है कि वे दवा परीक्षण प्रक्रिया से कभी भी अपने को अलग कर सकते हैं।
हार्डिया ने माना है कि शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय इंदौर में पोलियो वैक्सीन व स्वाइन फ्लू वैक्सीन का परीक्षण किया गया है। वे यह मानने को तैयार नहीं है कि दवा परीक्षण करके मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications