महंगाई के विरोध में विपक्षी दलों का धरना
संसद के दोनो सदनों की कार्यवाही गुरुवार को 12 बजे तक स्थगित होने के बाद विपक्षी दलों के सदस्य सरकार के खिलाफ इस धरने में शामिल हुए। इस धरने में माक्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), राष्ट्रीय जनता दल (राजद), जनता दल (सेकुलर), ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) और तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के सदस्यों ने हिस्सा लिया।
माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा, "वाम दल और सभी धर्मनिरपेक्ष पार्टियां सरकार के खिलाफ एकजुट हुई हैं। यह सरकार महंगाई के मोर्चे पर पूरी तरह विफल रही है।"
इन विपक्षी दलों ने पेट्रोल, डीजल, केरोसीन और रसोई गैस की कीमतों में हुई वृद्धि को वापस लेने की मांग की। येचुरी ने कहा, "हम उन नियमों के तहत चर्चा चाहते हैं जिनमें मतदान का भी प्रावधान है। इससे सरकार कुछ ठोस कदम उठाने को विवश होगी।"
सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे राजद के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने कहा, "यह सरकार वोटों के लिए कीमतों को घटाती है और सत्ता में आते ही उसे वापस ले लेती है। वर्ष 1977 (आपातकाल) की तरह आज पूरा विपक्ष एकजुट है। मुझे खुशी है कि वाम दलों ने भी गांधीवादी विचारधारा को स्वीकार किया है।"
माकपा नेता गुरुदास दासगुप्ता ने कहा, "हम संसद को बाधित नहीं करना चाहते क्योंकि बहुत सारे महत्वपूर्ण मुद्दे हैं लेकिन इस समय कीमतों में वृद्धि का मुद्दा सबसे महत्वपूर्ण है।"
पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा ने भी पेट्रोलियम पदार्थो की कीमतों में वृद्धि को वापस लेने की मांग की। दूसरी ओर से समाजवादी पार्टी (सपा) ने संसद भवन के मुख्य द्वारा पर अलग से प्रदर्शन किया।
विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शन और हंगामे पर कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा कि संसद के भीतर नारेबाजी करने से कीमतों में कोई कमी नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि विपक्ष संसद की कार्यवाही को बाधित करना चाहता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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