'गरीबी, कश्मीर का जिक्र न करें कैमरन'
मंगलवार रात भारत पहुंचने वाले कैमरन के लिए पिछले दो दिनों से ब्रिटिश मीडिया में सलाहों की भरमार रही कि यदि दौरे को सफल बनाना है तो भारत को नाराज नहीं करना चाहिए।
समाचार पत्र 'फाइनेंशियल टाइम्स' ने उपमहाद्वीप से जुड़े कुछ मुद्दों पर ब्रिटिश और भारतीय रुख की भिन्नता का उल्लेख किया है। उसके स्तम्भकार एलेक्स बार्कर ने अपने ब्लॉग पर कैमरन से भारत की बड़ी समस्याओं की अनदेखी करने को कहा।
उनके अनुसार इसमें सबसे पहले कश्मीर है। इस मुद्दे पर ब्रिटिश पूर्व विदेशमंत्री रॉबिन कुक और डेविड मिलीबैंड के विवादास्पद बयानों का हवाला देते हुए बार्कर ने कैमरन से आलोचना, सहायता का प्रस्ताव करने या आतंकवाद से निपटने को शांति से जोड़ने से से दूर रहने की सलाह दी।
बार्कर के अनुसार भारत की दूसरी सबसे बड़ी समस्या गरीबी है। दुनिया में सबसे अधिक गरीब लोग भारत में हैं। इसे बहुत तूल देने के बजाए नए भारत के बारे में बात करें। सहायता की समीक्षा पर बात करें। संरक्षणवादी रवैया घातक हो सकता है।
बार्कर के अनुसार कैमरन ऊर्जावान और युवा हैं। उनकी तुलना में भारतीय नेता उम्र में दोगुने हैं। इसलिए वार्ता का औपचारिक होना बेहतर होगा।
स्तम्भकार के अनुसार आव्रजकों की सीमा तय करना भारत के उच्च वर्ग के लिए एक बड़ा मुद्दा है। भारत के केंद्रीय वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने इस माह के आरंभ में स्वयं कैमरन से यह चिंता जाहिर की थी। कड़े वीजा नियमों से भारतीय ब्रिटेन में काम और अध्ययन करने के लिए प्रोत्साहित नहीं होंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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