वोट मांगने वाले डीएम के खिलाफ कार्रवाई की मांग

जिलाधिकारी के विवादास्पद बयान पर कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) एकजुट होकर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

मामला बुधवार शाम उस समय प्रकाश में आया जब स्थानीय समाचार चैनलों ने उस सरकारी बैठक का फुटेज प्रसारित करना शुरू किया, जिसकी अध्यक्षता जिलाधिकारी कर रहे थे।

जिलाधिकारी मंगलवार को जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ राज्य सरकार द्वारा शहरी गरीबों के लिए चलाई जा रही काशीराम शहरी गरीब आवास योजना की समीक्षा कर रहे थे।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि फुटेज में स्पष्ट है कि जिलाधिकारी कह रहे हैं कि यदि राज्य सरकार गरीब आवास के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है और अगर इससे उसे 1500 वोट न मिले तो बेकार है।

सिंह के मुताबिक जब जिलाधिकारी को पता चला कि बैठक की गतिविधि समाचार चैनलों के कैमरों में रिकॉर्ड हो रही है तो उन्हें डांट कर माइक का बटन बंद कर दिया। यह फुटेज बसपा सरकार के खिलाफ पुख्ता सबूत है कि किस तरह से वह सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर रही है।

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता एच. एन. दीक्षित ने संवाददाताओं से कहा प्रशासनिक अधिकारी का दायित्व जनता की सेवा करना होता है, न कि सत्तारूढ़ दल के लिए वोट मांगना। उन्होंने कहा कि फुटेज में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि कैसे एक प्रशासनिक अधिकारी राजनीतिक एजेंट की तरह वोट मांग रहा है।

दीक्षित ने कहा कि यह बहुत शर्मनाक है। पूरे मामले की जांच हो और दोषी को दंडित किया जाय। उधर, सपा ने भी मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की है और पूरे मामले के जांच की मांग की और कहा कि जिलाधिकारी को तत्काल वहां से हटाया जाए।

इस मामले पर प्रतिक्रिया जानने के लिए जिलाधिकारी से संपर्क नहीं हो पाया है। उनके सरकारी आवास का फोन नंबर मिलाने पर बताया गया कि वह बाहर हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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