9,000 से अधिक अर्धसैनिकों ने छोड़ी नौकरी
नई दिल्ली, 27 जुलाई (आईएएनएस)। अर्धसैनिक बल के 9,000 से अधिक जवानों ने विभिन्न कारणों से इस वर्ष अपनी नौकरी को अलविदा कहा है। कारणों में दूरवर्ती इलाकों में तैनाती का तनाव भी शामिल है।
संसद में मंगलवार को बताया गया कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) इससे सर्वाधिक पीड़ित हुआ है। जबकि इसी बल पर नक्सल विरोधी अभियान और जम्मू एवं कश्मीर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की व्यापक जिम्मेदारी है।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय माकन ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में कहा कि सीआरपीएफ के कम से कम 3,522 जवान इस वर्ष नौकरी से अलग हुए हैं।
इस मामले में दूसरा स्थान सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) का है। इसके 3,000 जवान नौकरी से अलग हुए हैं। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) से भी 1,400 जवानों ने नौकरी से तौबा किया है।
माकन ने कहा कि इस तरह इस वर्ष अर्ध सैन्य बलों से कुल 9,036 जवान अलग हुए हैं।
माकन ने कहा, "जवानों के बल से अलग होने के मुख्य कारणों में शारीरिक अक्षमता, सेवानिवृत्ति, अनुशासनात्मक कार्रवाई के कारण नौकरी से बर्खास्तगी, मौत या अपंगता, इस्तीफा व स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति शामिल है। इसमें पारिवारिक, निजी या घरेलू समस्याएं भी हैं। लंबे समय तक परिवार से दूर रहने की मजबूरी, दूरवर्ती या दुर्गम इलाकों में कठिन ड्यूटी, बीमारी, मानसिक तनाव, मानसिक व भावनात्मक बीमारी के मामले कारणों में शामिल हैं।"
माकन ने कहा कि गलत कामों के लिए दंडित होने का डर, आकर्षक वैकल्पिक नौकरी और छठे वेतन आयोग के बाद पूरे पेंशन के लिए सेवा अवधि में हुई कमी भी नौकरी से अलग होने के कारणों में शामिल हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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