महंगाई के मुद्दे पर संसद में हंगामा (राउंडअप)

विपक्ष के इस रुख को देखते हुए बुधवार को भी संसद में हंगामा होने के पूरे आसार हैं। विपक्ष जहां लोकसभा में कार्य स्थगन प्रस्ताव के तहत वहीं राज्यसभा में नियम 168 के अधीन बहस कराने की मांग को लेकर अड़ा हुआ है वहीं सरकार इन नियमों के अधीन चर्चा से कतरा रही है।

लोकसभा की कार्यवाही आरंभ होते ही नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने कहा कि विपक्ष की ओर से दिए गए कार्यस्थगन प्रस्ताव पर तत्काल चर्चा कराई जाए। उन्होंने कहा कि महंगाई पर लोगों के 'दर्द' को समझते हुए विपक्ष इस मुद्दे पर तत्काल बहस चाहता है।

सुषमा ने कहा, "मिट्टी के तेल और रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि की वजह से आज गृहणियां और समाज के अन्य लोग परेशान हैं। हमने महंगाई के विरोध में कार्यस्थगन प्रस्ताव दिया है। इस पर तत्काल चर्चा कराई जाए। पूरा विपक्ष लोगों के इसी दर्द को लेकर बहस चाहता है।"

लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने बार-बार सदस्यों से शांत होने की अपील की। परंतु हंगामा नहीं थमा। इसके बाद उन्होंने कार्यवाही दिन में 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। कार्यवाही दोबारा आरंभ होने पर विपक्षी सदस्य महंगाई पर बहस की मांग पर अड़े रहे। हंगामा जारी रहने पर लोकसभा अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही दिन में दूसरी बार दो बजे तक स्थगित करनी पड़ी।

हंगामा जारी रहने की वजह से लोकसभा की कार्यवाही बुधवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उपनेता गोपीनाथ मुंडे ने संसद भवन परिसर में आईएएनएस से कहा, "हम (विपक्ष) एकजुट हैं। हम कार्यस्थगन प्रस्ताव और इस मुद्दे पर मतदान चाहते हैं। महंगाई का मुद्दा आम लोगों की जिंदगी से जुड़ा है। सरकार इससे कैसे पल्ला झाड़ सकती है? हम किसी और विषय पर चर्चा नहीं करेंगे।"

बाद में मुंडे ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "हम लोकसभा में कार्यस्थगन प्रस्ताव और राज्यसभा में नियम 168 के तहत चर्चा चाहते हैं। इसके अलावा किसी और नियम के तहत चर्चा हमें स्वीकार नहीं है। हम मत विभाजन चाहते हैं ताकि यह स्पष्ट हो जाए कि आम आदमी से जुड़े महंगाई के मुद्दे पर कौन किसके साथ है।"

मार्क्‍सवदी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि सरकार के पास यदि पर्याप्त संख्याबल है तो वह इन नियमों के अधीन चर्चा करने से क्यों कतरा रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार अन्य नियमों के तहत चर्चा कराने को तैयार है लेकिन विपक्षी मांगों के अनुसार चर्चा करने को तैयार नहीं है, जबकि महंगाई आज सबसे बड़ा मुद्दा है।

येचुरी ने कहा कि हम इन नियमों के तहत चर्चा कराकर सरकार पर दबाव बनाना चाहते हैं ताकि सरकार ईंधन के मूल्यों में वृद्धि वापस ले और लोगों को महंगाई से राहत मिले।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री मुरली देवड़ा ने लोकसभा में कहा कि ईंधन की कीमतों में वृद्धि से आम आदमी पर मामूली असर पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि आंकड़ों के लिहाज से देखें तो इससे एक परिवार पर रोजाना रसोई गैस के खर्च पर एक रुपये से भी कम और केरोसीन के खर्च पर पचास पैसे का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

देवड़ा ने कहा, "26 जून को पेट्रोलियम पदार्थो की कीमतों में वृद्धि के पीछे 'प्राथमिक उद्देश्य' तेल विपणन कंपनियों पर सब्सिडी के बोझ को घटाना है। इससे स्वास्थ्य, शिक्षा और खाद्य सुरक्षा जैसी सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं में अधिक धन आवंटित किया जा सकेगा।"

उन्होंने कहा कि निर्णय लेते समय सरकार आम आदमी पर पड़ने वाले बोझ को लेकर काफी सतर्क थी। देवड़ा ने कहा, "उपभोक्ताओं पर न्यूनतम बोझ ही डाला गया।"

संसद में हंगामे और विपक्ष के कार्यस्थगन प्रस्ताव पर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने संवाददाताओं से कहा, "यह सदन को बाधित करने वाला प्रस्ताव है न कि चर्चा के लिए लाया गया प्रस्ताव।"

उधर, राज्यसभा में भी हंगामे की कमोबेश यही स्थिति रही। सदन की कार्यवाही आरंभ होते ही विपक्षी सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। हंगामे की वजह से सदन की कार्यवाही पहले 12 बजे तक और उसके बाद बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।

लोकसभा की तरह राज्यसभा में भी महंगाई के मुद्दे पर पूरा विपक्ष एकजुट दिखा। समाजवादी पार्टी (सपा) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सदस्यों ने भी जमकर हंगामा किया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+