ईंधन कीमतों में वृद्धि का बोझ मामूली : देवड़ा
उन्होंने कहा कि आंकड़ों के लिहाज से देखें तो इससे एक परिवार पर रोजाना रसोई गैस के खर्च पर एक रुपये से भी कम और केरोसीन के खर्च पर पचास पैसे का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
देवड़ा ने कहा, "26 जून को पेट्रोलियम पदार्थो की कीमतों में वृद्धि के पीछे 'प्राथमिक उद्देश्य' तेल विपणन कंपनियों पर सब्सिडी के बोझ को घटाना है। इससे स्वास्थ्य, शिक्षा और खाद्य सुरक्षा जैसी सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं में अधिक धन आवंटित किया जा सकेगा।"
उन्होंने कहा कि निर्णय लेते समय सरकार आम आदमी पर पड़ने वाले बोझ को लेकर काफी सतर्क थी।
देवड़ा ने कहा, "उपभोक्ताओं पर न्यूनतम बोझ ही डाला गया।"
उन्होंने कहा, "रसोई गैस के सिलेंडर पर 35 रुपये की वृद्धि से एक परिवार पर रोजाना एक रुपये से भी कम का बोझ पड़ता है। इसी तरह, केरोसीन की कीमत में प्रति लीटर तीन रुपये की बढ़ोतरी से ग्रामीण इलाके के एक परिवार के रोजाना खर्च में 50 पैसे से भी कम की बढ़ोतरी होती है।"
राज्य सरकारों पर पेट्रोलियम पदार्थो पर लगने वाले करों की दरों को ऊंचा रखने का आरोप लगाते हुए देवड़ा ने कहा कि पेट्रोल और डीजल पर लगने वाला बिक्री कर क्रमश: 33 और 24.7 फीसदी है जो काफी अधिक है।
उन्होंने कहा, "कुछ राज्य सरकारें केरोसीन पर 12.5 फीसदी का बिक्री कर वसूल कर रही हैं। यह भी काफी ज्यादा है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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