संसद में कांग्रेस व विपक्ष के बीच शक्ति प्रदर्शन की संभावना
नई दिल्ली, 25 जुलाई (आईएएनएस)। संसद के मानसून सत्र में कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच 2005 में फर्जी मुठभेड़ में मारे गए एक कथित इस्लामी के मामले को लेकर नोकझोक की पूरी संभावना है। इसके साथ ही अन्य मुद्दों पर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव की जमीन तैयार है।
विपक्षी पार्टियां मूल्य वृद्धि, नक्सली हिंसा, लगातार हो रही रेल त्रासदी और भारत-पाकिस्तान के बीच वार्ता की विफलता जैसे मुद्दों पर कांग्रेस नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में है।
भाजपा केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा गुजरात के गृह राज्य मंत्री अमित शाह के खिलाफ हत्या का आरोप लगाए जाने के बाद कांग्रेस से डरी हुई है।
भाजपा का कहना है कि सीबीआई ने कांग्रेस के इशारे पर यह कदम उठाया है। यह देश के मुसलमानों को अपनी ओर आकर्षित करने की कांग्रेस की वोट की राजनीति है।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि हालांकि हाल में पेट्रोलियम पदार्थों की मूल्य वृद्धि सहित महंगाई विपक्ष के एजेंडे में सबसे ऊपर होगा, लेकिन उसके पास उठाने के लिए और भी मुद्दे हैं। इसमें 1984 का भोपाल गैस कांड, 2जी स्पेक्ट्रम के आवंटन में हुई धांधली और कश्मीर घाटी में अंतहीन अशांति जैसे मुद्दे शामिल हैं।
विपक्ष इस बात से खुश है कि वह खाद्य पदार्थो की कीमतों में वृद्धि के खिलाफ पांच जुलाई को आयोजित राष्ट्रव्यापी बंद के लिए एकजुट हो गया था। लेकिन सरकार के पास भी खुश होने के कारण हैं।
संसद में शक्ति प्रदर्शन की संभावना के बावजूद विपक्ष बंटा हुआ है। वामपंथी नेताओं ने किसी संयुक्त हमले की संभावना को खारिज करते हुए कहा है कि सदन में भाजपा के साथ कोई समन्वय नहीं होगा।
हां, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) न तो संप्रग सरकार से खुश है और न तो यह विपक्षी खेमे के साथ ही सक्रिय है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता बासुदेव आचार्य ने आईएएनएस को बताया, "भाजपा के साथ सदन में समन्वय की कोई योजना नहीं है। लेकिन वे मुद्दों पर हमारे साथ जुड़ सकते हैं।"
मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है और 27 अगस्त को उसका समापन हो जाएगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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