अफगानिस्तान में तालिबान को बढ़ावा दे रहा पाकिस्तान : रिपोर्ट

Taliban
वाशिंगटन। अमेरिका अफगानिस्तान में जिस तालिबान आतंकवाद को खत्म करना चाहता है पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी उसके साथ मिली हुई है और उसे बढ़ावा दे रही है। यह स्थिति तब है जब पाकिस्तान को प्रति वर्ष अमेरिका से आतंकियों से मुकाबले में मदद के नाम पर एक अरब डॉलर से अधिक की आर्थिक मदद प्राप्त होती है। इससे पाकिस्तान का दोहरा चरित्र उजागर हुआ है।

कई गुप्त सैन्य रिपोर्टों के एक दस्तावेज से इस बात का खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान अपनी खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसिस इंटेलिजेंस (आईएसआई) के जरिए अफगानिस्तान में आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। यह रिपोर्ट रविवार को सार्वजनिक हुई है।

गुप्‍त रूप से तालिबान से मिला हुआ है पाक

विकीलीक्स नामक संगठन द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों में कहा गया है कि अमेरिका का एक प्रत्यक्ष भागीदार पाकिस्तान, गुप्त रणनीतिक सत्रों में अपनी खुफिया एजेंसी के प्रतिनिधियों को तालिबान से सीधे मिलने की अनुमति देता है। ये गुप्त रणनीतिक सत्र उन आतंकी समूहों का नेटवर्क बनाने के लिए आयोजित किए जाते हैं जो अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ लड़ते हैं। इसके साथ ही इन सत्रों में अफगानी नेताओं की हत्या की साजिशें भी रची जाती हैं।

लेकिन इससे संबंधित कई सारी रिपोर्ट उन सूत्रों पर निर्भर हैं जिसे सेना विश्वस्त मानती है। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी हमले की साजिश रचने में अलकायदा के साथ मिल कर काम कर रही है।

लेकिन मजेदार बात यह कि अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन इसी महीने अपने इस्लामाबाद दौरे के दौरान 50 करोड़ डॉलर मदद की घोषणा की थी और अमेरिका व पाकिस्तान के साझेदारों का इस सामूहिक मकसद में हाथ बंटाने का आह्वान किया था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तानी सेना ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी की तरह शत्रु और मित्र दोनों रूपों में काम किया है। अमेरिकी अधिकारियों को इसके इस दोहरे चरित्र पर लंबे समय से संदेह रहा है। यानी एक तरफ पाकिस्तान सहयोग के नाम पर खास अमेरिकी मांगों को पूरा करता है तो वहीं दूसरी ओर उन तमाम आतंकी नेटवर्क के जरिए अफगानिस्तान में अपना प्रभाव बनाए रखता है, जिनके खात्मे के लिए अमेरिका लड़ाई लड़ रहा है।

अमेरिकी कांग्रेस के कई अधिकारियों का कहना है कि वर्षो से बार-बार निवेदन किया जा रहा है कि पाकिस्तान द्वारा आतंकी समूहों को दिए जा रहे सहयोग के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई जाए, लेकिन पेंटागन और सीआईए से उन्हें अस्पष्ट और भ्रामक जानकारी ही प्राप्त हुई है।

आईएसआई ने टिप्‍पणी से किया इंकार

आईएसआई के एक प्रवक्ता ने रविवार को इस्लामाबाद में कहा था कि एजेंसी इस रिपोर्ट पर तब तक कोई टिप्पणी नहीं करेगी, जब तक कि वह दस्तावेज का अध्ययन नहीं कर लेती। अमेरिका में पाकिस्तानी राजदूत हुसैन हक्कानी ने कहा, "वीकीलीक्स द्वारा जारी किए गए दस्तावेज वर्तमान जमीनी सच्चाई को बयान नहीं करते।"

जुलाई 2008 में सीआईए के उपनिदेशक, स्टीफन आर.केप्स ने पाकिस्तानी अधिकारियों के सामने इस बात का सबूत पेश किया था कि आईएसआई ने काबुल स्थित भारतीय दूतावास पर घातक हमले की साजिश रचने में आईएसआई ने मदद की थी।

वर्तमान दस्तावेज में शामिल एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पोलैंड की खुफिया एजेंसी ने भारतीय दूतावास पर हुए हमले के एक सप्ताह पहले दूतावास पर एक जटिल हमले की चेतावनी दी थी। लेकिन इस रिपोर्ट में पोलिश खुफिया एजेंसी द्वारा दी गई चेतावनी में आईएसआई का नाम नहीं है।

अगस्त 2008 में आईएसआई में एक ऐसे कर्नल की पहचान हुई थी, जिसने एक तालिबान के साथ मिल कर राष्ट्रपति हामिद अंसारी के हत्या की साजिश रची है। लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साजिश को कब और कैसे अंजाम दिया जाएगा, इस बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।

कई रिपोर्टों में कहा गया है कि जनरल गुल सहित कई वर्तमान और पूर्व आईएसआई अधिकारियों ने नए आत्मघाती हमलावरों की भर्ती के लिए पेशावर शहर के पास कई मदरसों का दौरा किया था।

अमेरिकी खुफिया एजेंसी को पता चला है कि आईएसआई के इशारे पर हक्कानी नेटवर्क ने अफगानिस्तान में भारतीय अधिकारियों, विकास कार्यो से जुड़े कार्यकर्ताओं और अभियंताओं पर हमले के लिए हमलावरों को भेजा है। अफगानिस्तान सरकार पर हमले के लिए भी साजिशें रची गई हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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