रक्षा क्षेत्र में एफडीआई को लेकर उद्योग संगठन एकमत नहीं (लीड-1)
प्रमुख औद्योगिक संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) ने रक्षा निर्माण क्षेत्र में एफडीआई की सीमा 26 फीसदी से बढ़ाने के खिलाफ सचेत किया है, जबकि भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने इसे बढ़ाकर 49 फीसदी करने की वकालत की है।
'सतर्कतापूर्वक विचार और विश्लेषण की जरूरत' बताते हुए फिक्की ने एक रिपोर्ट में कहा है, "रक्षा क्षेत्र में एफडीआई की 26 फीसदी सीमा से बीएई, ईएडीएस, सिकॉरस्की एंड लॉकहीड मार्टिन जैसी विदेशी रक्षा ओईएम (मूल उपकरण निर्माता) कंपनियां पहले ही आकर्षित हैं और देश के रक्षा क्षेत्र में भारी निवेश कर रही हैं। इसलिए रक्षा जैसे सामरिक क्षेत्र में एफडीआई की सीमा को बढ़ाने संबंधी किसी निर्णय से पहले सतर्कतापूर्वक विचार और विश्लेषण की जरूरत होगी।"
फिक्की ने भारतीय रक्षा उद्योग के 'मजबूत और गुणात्मक विकास की सुविधा' के लिए कई उपायों का सुझाव दिया है। इनमें वर्टिकल बाजारों (ऐसे व्यवसायों और खरीददारों का समूह, जो विशेष जरूरतों पर आधारित कारोबार में शामिल हो) का निर्माण शामिल है।"
इससे पहले सीआईआई ने कहा था कि रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की वर्तमान सीमा को 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 49 फीसदी करने की बात कही थी।
सीआईआई ने मई में अपनी रिपोर्ट में कहा, "उद्योग जगत रक्षा क्षेत्र में 100 प्रतिशत विदेशी निवेश के पक्ष में नहीं है। एफडीआई की 49 प्रतिशत सीमा लाभकारी होगी।"
सरकार ने मई 2001 में रक्षा क्षेत्र में एफडीआई की सीमा 26 प्रतिशत निर्धारित की थी।
वर्ष 2008 की रक्षा खरीद प्रक्रिया के अनुसार रक्षा क्षेत्र में अलग-अलग मामलों में 49 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति है। विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड ने 49 प्रतिशत एफडीआई के किसी प्रस्ताव को अब तक मंजूरी नहीं दी है।
सीआईआई ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में विदेशी निवेश इसलिए आवश्यक है क्योंकि अधिकांश रक्षा उत्पादन में उच्च प्रौद्योगिकी का उपयोग होता है और विदेशी कंपनियां केवल हिस्सेदारी मिलने पर ही उनका स्थानांतरण भारतीय कंपनियों को करती हैं। देश के रक्षा क्षेत्र को वित्त और प्रौद्योगिकी दोनों हासिल करना ही एफडीआई का उद्देश्य है।
सीआईआई ने रक्षा क्षेत्र को करों में छूट और अनुदान देने तथा विदेशी प्रौद्योगिकी के खिलाफ अपने देश के कुशल मानवशक्ति का लाभ उठाने का सुझाव दिया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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